तीन दशकों से भी अधिक समय से, एकता कपूर, जिन्हें भारतीय टेलीविजन की ‘क्वीन’ कहा जाता है, भारत के ड्रॉइंग रूम की बातचीत की धुरी रही हैं। बालाजी टेलीफिल्म्स के माध्यम से उन्होंने सिर्फ टीवी शो नहीं बनाए, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीक गढ़े। 2026 में भी, जब इंडस्ट्री स्ट्रीमिंग युग में आगे बढ़ चुकी है, तुलसी, पार्वती और कोमोलिका जैसे नाम आज भी भारतीय समाज में खास गुणों और अवगुणों के प्रतीक बने हुए हैं।
आइए नजर डालते हैं एकता कपूर द्वारा रचित 8 ऐसे प्रतिष्ठित महिला किरदारों पर, जिन्होंने भारतीय टेलीविजन को नई पहचान दी और घर-घर में अपनी जगह बनाई।
तुलसी विरानी (क्योंकि सास भी कभी बहू थी)
स्मृति ईरानी द्वारा निभाया गया तुलसी विरानी का किरदार सिर्फ एक भूमिका नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय पहचान बन गया था। विरानी परिवार की आदर्श बहू के रूप में तुलसी पारंपरिक भारतीय संयुक्त परिवार की नैतिक दिशा दर्शाती थीं। उनकी लोकप्रियता इतनी जबरदस्त थी कि जब शो में उनके पति मिहिर की मृत्यु हुई, तो पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई, जिसके चलते निर्माताओं को उन्हें वापस लाना पड़ा। आज भी तुलसी स्क्रीन पर ‘आदर्श भारतीय महिला’ का प्रतीक मानी जाती हैं।
पार्वती अग्रवाल (कहानी घर-घर की)
अगर तुलसी एक मजबूत रक्षक थीं, तो साक्षी तंवर की पार्वती अग्रवाल शांत और सहनशील शक्ति की मिसाल थीं। उन्होंने परिवार के अंदरूनी रिश्तों और राजनीति को संवेदनशील तरीके से दिखाया। एक आज्ञाकारी बहू से लेकर अन्याय के खिलाफ खड़ी होने वाली महिला तक का उनका सफर लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बना।
प्रेरणा शर्मा (कसौटी ज़िंदगी की)
श्वेता तिवारी की प्रेरणा भारत में अधूरी और संघर्षपूर्ण प्रेम कहानियों का चेहरा बन गईं। तुलसी और पार्वती के पारिवारिक किरदारों से अलग, प्रेरणा की कहानी उनके और अनुराग बसु के बीच के प्रेम पर आधारित थी। लगातार दुख और सामाजिक दबावों के बावजूद उनका मजबूत रहना दर्शाता है कि संवेदनशीलता भी एक शक्ति हो सकती है।
कोमोलिका (कसौटी ज़िंदगी की)
प्रेरणा की कहानी को पूरा करने के लिए कोमोलिका का जिक्र जरूरी है। उर्वशी ढोलकिया की कोमोलिका ने टीवी की ‘वैंप’ की परिभाषा ही बदल दी। उनका खास बैकग्राउंड म्यूजिक, स्टाइलिश बिंदी और नाटकीय अंदाज़ उन्हें यादगार बनाते हैं। वह एक ऐसी खलनायिका थीं जिन्हें लोग नफरत करते हुए भी पसंद करते थे।
अर्चना देशमुख (पवित्र रिश्ता)
अंकिता लोखंडे की अर्चना ने मध्यमवर्गीय जीवन की सच्चाइयों को दर्शाया। साधारण साड़ी और परिवार के प्रति समर्पण के साथ उनका किरदार दर्शकों को अपने जैसा लगा। मानव (स्वर्गीय सुशांत सिंह राजपूत) के साथ उनकी जोड़ी आज भी टीवी की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में गिनी जाती है।
कशिश गरेवाल (कहीं तो होगा)
आमना शरीफ की कशिश 2000 के दशक की शुरुआत में एक नई सोच का प्रतीक बनीं। वह आधुनिक होते हुए भी पारंपरिक मूल्यों को मानने वाली महिला थीं। सुजल गरेवाल के साथ उनका ‘नफरत से प्यार’ वाला रिश्ता युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ।
डॉ. इशिता अय्यर भल्ला (ये है मोहब्बतें)
दिव्यांका त्रिपाठी दहिया की इशिता ने कई सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ा। एक डेंटिस्ट के रूप में उन्होंने एक सीईओ से शादी की ताकि उसकी बेटी को मां का प्यार मिल सके। उनका किरदार बांझपन, पुनर्विवाह और मिश्रित परिवार जैसे जटिल मुद्दों को दर्शाता है।
शिवान्या (नागिन)
मौनी रॉय द्वारा निभाया गया शिवान्या का किरदार सुपरनैचुरल शैली में एक नया ट्रेंड लेकर आया। नागिन के रूप में उनकी कहानी ने टीवी पर एक नया जॉनर स्थापित किया। उनका स्टाइल, डांस और रहस्यमयी व्यक्तित्व उन्हें आधुनिक दौर की आइकॉनिक शख्सियत बनाता है।
ये सभी किरदार सिर्फ प्राइम टाइम तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने फैशन ट्रेंड्स को भी प्रभावित किया—तुलसी की साड़ियों से लेकर कोमोलिका की बिंदियों तक। साथ ही, इन्होंने परिवारिक मूल्यों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं भी शुरू कीं, जिससे एकता कपूर भारतीय पॉप कल्चर की सच्ची अग्रदूत बन गईं।

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