चंडीगढ़, 8 अगस्त : पंजाब में 13 मल्टी परपज हेल्थ वर्करों की भर्ती को लेकर कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सवाल उठाए हैं। पंजाब की सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर कांग्रेस सांसद और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है। रंधावा ने स्वास्थ्य विभाग में नियुक्त किए गए 13 मल्टी पर्पज हेल्थ वर्करों में से 10 उम्मीदवारों के हरियाणा से संबंधित होने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब मांगा है।
रंधावा का कहना है कि पंजाब के युवा लंबे समय तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और सरकारी नौकरी की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में यदि भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं के अवसरों को लेकर सवाल उठते हैं तो सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
13 नियुक्तियों में 10 उम्मीदवारों को लेकर सवाल
रंधावा ने 13 मल्टी परपज हेल्थ वर्करों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि 13 मल्टी पर्पज हेल्थ वर्करों की नियुक्ति में 10 उम्मीदवारों के हरियाणा से संबंधित होने की बात सामने आई है। उन्होंने सरकार से इस संबंध में भर्ती नियमों और उम्मीदवारों की पात्रता को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की।
रंधावा ने कहा कि पंजाब की सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं में पहले से चिंता है। उनके अनुसार सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भर्ती प्रक्रिया में पंजाब के युवाओं को उपलब्ध अवसरों के संबंध में किसी तरह का अन्याय न हो।
हालांकि, 13 नियुक्तियों में 10 उम्मीदवारों के हरियाणा से संबंधित होने का दावा रंधावा की ओर से किया गया है। इस संबंध में सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण इस बयान में उपलब्ध नहीं है।
सुखजिंदर सिंह रंधावा की पोस्ट यहां देखें
पंजाब के युवाओं के अधिकार पर जोर
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए पंजाब के युवा वर्षों तक मेहनत करते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय और संसाधन लगाने वाले अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी भर्ती में दूसरे राज्यों के उम्मीदवार नियमों के तहत पात्र हैं तो सरकार को भर्ती नियमों और पात्रता की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही, यदि किसी नियम का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की भर्ती परीक्षाओं की जांच की मांग
रंधावा ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा आयोजित या उससे संबंधित भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की।
उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर किसी भी तरह की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। इससे अभ्यर्थियों का भरोसा कायम रखने में मदद मिलेगी और भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। रंधावा ने सरकार से यह भी पूछा कि भर्ती परीक्षाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब तक कौन से कदम उठाए गए हैं।
फार्मासिस्ट ऑफिसर परीक्षा का मामला भी उठाया
सांसद रंधावा ने फार्मासिस्ट ऑफिसर भर्ती परीक्षा में कथित नकल और ब्लूटूथ उपकरणों के इस्तेमाल के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले ने भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े किए थे।
उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है। साथ ही उन्होंने अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता बताई। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फार्मासिस्ट ऑफिसर भर्ती परीक्षा में कथित नकल और ब्लूटूथ उपकरणों के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों को रंधावा ने अपने बयान में उठाया है। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों पर किसी अंतिम निष्कर्ष या जांच के परिणाम का उल्लेख नहीं है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान से स्पष्ट नीति बनाने की मांग
सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से पंजाब की सरकारी नौकरियों में युवाओं के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिकायतों और संदेह वाले मामलों में स्वतंत्र जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल सरकार और विभागों के लिए ही नहीं, बल्कि परीक्षा देने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए जरूरी है। इससे योग्य अभ्यर्थियों को भरोसा मिलेगा कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा रही है।
आगे सरकार के जवाब पर रहेगी नजर
इस पूरे मामले में अब सरकार की ओर से आधिकारिक जवाब महत्वपूर्ण रहेगा। खास तौर पर 13 मल्टी पर्पज हेल्थ वर्करों की नियुक्ति में उम्मीदवारों की पात्रता, भर्ती नियमों और चयन प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
इसके अलावा फार्मासिस्ट ऑफिसर भर्ती परीक्षा में लगाए गए आरोपों पर हुई कार्रवाई और बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से संबंधित भर्ती परीक्षाओं की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सरकार का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
पंजाब में सरकारी भर्तियां युवाओं के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसलिए किसी भी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, नियमों की स्पष्टता और शिकायतों की निष्पक्ष जांच से ही अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत किया जा सकता है।
Live24India Analysis : सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब की सरकारी भर्ती व्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। पहला मुद्दा मल्टी पर्पज हेल्थ वर्करों की नियुक्ति में उम्मीदवारों के राज्य संबंधी विवरण का है, जबकि दूसरा भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़ा है। हालांकि, उपलब्ध बयान में इन आरोपों के समर्थन में कोई विस्तृत सरकारी दस्तावेज या आधिकारिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है।
ऐसे मामलों में सरकार के आधिकारिक आंकड़े और भर्ती नियम सबसे महत्वपूर्ण होंगे। यदि उम्मीदवार निर्धारित नियमों के तहत पात्र हैं तो उनकी नियुक्ति की वैधता स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं, यदि किसी परीक्षा या चयन प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत है तो निष्पक्ष जांच के जरिए तथ्य सामने लाना अभ्यर्थियों के भरोसे के लिए जरूरी है।
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