चंडीगढ़, 8 अगस्त : पंजाब में मेडिकल शिक्षा की बढ़ती फीस को लेकर कांग्रेस विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराने का दावा करने वाली पंजाब सरकार के कार्यकाल में एमबीबीएस की पढ़ाई महंगी होती जा रही है। इसका सबसे अधिक असर मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है।
परगट सिंह ने कहा कि पंजाब में बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना देखते हैं, लेकिन लगातार बढ़ती फीस के कारण यह सपना अब आर्थिक रूप से कठिन होता जा रहा है। उन्होंने सरकार से मेडिकल शिक्षा को सस्ता और आम परिवारों की पहुंच में रखने की मांग की।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस पर उठाए सवाल
परगट सिंह के अनुसार पंजाब के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की ट्यूशन फीस 9.98 लाख रुपये से बढ़ाकर 10.83 लाख रुपये कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हॉस्टल और मेस जैसे खर्च भी छात्रों को वहन करने पड़ते हैं।
उनका दावा है कि इन अतिरिक्त खर्चों को जोड़ने के बाद एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने वाले छात्र और उनके परिवार पर शुरुआती स्तर पर ही करीब 13 से 14 लाख रुपये का आर्थिक बोझ आ सकता है।
परगट सिंह ने सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में पंजाब के परिवार अपने बच्चों को डॉक्टर बनाना चाहते हैं, तो सरकार मेडिकल शिक्षा की लागत कम करने के बजाय उसे महंगा क्यों कर रही है।
निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस और ज्यादा
कांग्रेस विधायक ने निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब में करीब 60 प्रतिशत एमबीबीएस सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में हैं।
उनके मुताबिक निजी मेडिकल कॉलेजों में सरकारी कोटे की एमबीबीएस सीट के लिए ट्यूशन फीस लगभग 24.67 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जबकि मैनेजमेंट कोटे की ट्यूशन फीस 60.92 लाख रुपये तक बताई गई है।
परगट सिंह ने कहा कि इतनी अधिक फीस उन परिवारों के लिए बड़ी चुनौती है, जो अपने बच्चों की मेडिकल शिक्षा के लिए वर्षों की बचत खर्च करने को मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा की लागत बढ़ने से प्रतिभाशाली छात्रों के सामने आर्थिक बाधाएं बढ़ सकती हैं।
पड़ोसी राज्यों से तुलना पर सरकार को घेरा
परगट सिंह ने पंजाब की मेडिकल फीस की तुलना पड़ोसी राज्यों से भी की। उनके अनुसार हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की कुल फीस करीब 4.23 लाख रुपये है।
उन्होंने दावा किया कि पंजाब में सरकारी मेडिकल कॉलेज की फीस करीब 6.60 लाख रुपये अधिक बैठती है। उनके मुताबिक इस तुलना से पंजाब में मेडिकल शिक्षा की लागत को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और दिल्ली का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में मेडिकल शिक्षा की फीस पंजाब की तुलना में कम है।
हालांकि, अलग-अलग राज्यों में फीस संरचना, पाठ्यक्रम अवधि, सरकारी नियम, कॉलेज की श्रेणी और अन्य शुल्क अलग हो सकते हैं। इसलिए राज्यवार तुलना करते समय समान शुल्क मदों और मौजूदा आधिकारिक फीस संरचना को देखना जरूरी है।
गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने चुनौती
परगट सिंह ने कहा कि मेडिकल शिक्षा की बढ़ती लागत का सीधा संबंध परिवारों की आर्थिक क्षमता से है। उनका कहना है कि यदि फीस लगातार बढ़ती रही तो आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन पढ़ाई में सक्षम छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा हासिल करना कठिन हो सकता है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को डॉक्टर बनने का समान अवसर नहीं मिलना चाहिए।
उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल सीटों और संस्थानों की संख्या बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि योग्य विद्यार्थियों के लिए शिक्षा आर्थिक रूप से सुलभ रहे।
मेडिकल सीटें बढ़ाने के साथ फीस भी सस्ती हो
पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार को मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में दो स्तरों पर काम करने की जरूरत है। एक तरफ मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ फीस को नियंत्रित रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि केवल शिक्षा क्षेत्र में सुधारों के दावे करने से बात पूरी नहीं होगी, जब तक आम परिवारों के बच्चे उन अवसरों का लाभ नहीं उठा पाते।
सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग
परगट सिंह ने पंजाब सरकार से एमबीबीएस फीस में बढ़ोतरी के कारणों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने पूछा कि पंजाब में मेडिकल शिक्षा की फीस पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक क्यों है और सरकार इस अंतर को कम करने के लिए क्या कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे आर्थिक स्थिति के कारण किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी का डॉक्टर बनने का सपना प्रभावित न हो।
अब इस मुद्दे पर पंजाब सरकार का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा। खास तौर पर सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की मौजूदा फीस, शुल्क संरचना तथा छात्रों के लिए उपलब्ध आर्थिक सहायता की जानकारी सामने आने से तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
