चंडीगढ़ : आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल (बादल) पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। ‘आप’ पंजाब के वरिष्ठ नेता और महासचिव बलतेज पन्नू ने कहा कि अकाली दल अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
बलतेज पन्नू ने सुखबीर बादल के हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि पिछले दिनों सुखबीर बादल ने यूनिवर्सिटी जाकर दावा किया था कि अकाली दल इस संस्थान को बचाने की लड़ाई लड़ेगा। उनके इस दावे को हास्यास्पद बताते हुए पन्नू ने एक पुरानी सरकारी चिट्ठी का हवाला दिया और बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अकाली दल की सरकार के समय ही लिखित रूप में ‘नो ऑब्जेक्शन’ (अनापत्ति) दिया गया था कि अगर पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्रीय यूनिवर्सिटी में बदला जाता है, तो पंजाब सरकार को कोई एतराज नहीं होगा। पन्नू ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग कल तक यूनिवर्सिटी को केंद्र के हवाले करने की तैयारी कर रहे थे, आज वही इसे बचाने का नाटक कर रहे हैं।
‘आप’ नेता ने कहा कि अकाली दल द्वारा पंजाब को धोखा देने की सूची बहुत लंबी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसवाईएल नहर के मामले में भी अकाली दल ने पैसे लेकर नहर निकालने की मंजूरी दी थी। इसी तरह, जब केंद्र सरकार तीन काले कृषि कानून लेकर आई थी, तब भी अकाली दल ने भाजपा का समर्थन किया था। उस समय इन्होंने कहा था कि इन कानूनों में कुछ भी गलत नहीं है और वे इसे लागू करवाएंगे, लेकिन जब पंजाब के किसानों ने इसका कड़ा विरोध किया, तो मजबूरी में इन्होंने इस्तीफे का ड्रामा रचा।
बलतेज पन्नू ने स्पष्ट किया कि अब वह दौर बीत चुका है जब सियासी नेता अलग-अलग जगहों पर जाकर अलग-अलग बयान देकर बच निकलते थे। आज पंजाब के लोग जागरूक हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बादल परिवार ने सत्ता में रहते हुए सूबे के हकों को कमजोर किया है। पिछली सरकारों, और विशेष रूप से अकाली दल ने अपने निजी और राजनीतिक फायदों के लिए पंजाब के हितों का सौदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पन्नू ने कहा कि आज पंजाब के लोग जिस संकट का सामना कर रहे हैं, वह इन्हीं पारंपरिक पार्टियों के स्वार्थ का नतीजा है। चाहे वह पंजाब के पानी का मुद्दा हो, एसवाईएल नहर का विवाद हो, या अब पंजाब यूनिवर्सिटी का मसला, अकाली दल और पिछली सरकारों ने हर मौके पर पंजाब के हितों से समझौता किया है।
अंत में पन्नू ने साफ किया कि आम आदमी पार्टी पंजाब यूनिवर्सिटी के संघीय ढांचे को बचाने और पंजाब के हकों के लिए मजबूती से खड़ी रहेगी और अकाली दल के झूठ को जनता के सामने बेनकाब करती रहेगी।
AAP
पंजाब सिर्फ अपना हिस्सा मांगता है, जितना लेता है उससे कहीं ज्यादा देश को देता है : धालीवाल
चंडीगढ़ : आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने गुरुवार को भाजपा नेता गेजा राम के हालिया बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इस बयान को “बेहद आपत्तिजनक, बचकाना, शर्मनाक और भाजपा की पंजाब विरोधी मानसिकता का प्रतीक” बताया है।
धालीवाल ने कहा कि गेजा राम की टिप्पणी पंजाब और यहां के लोगों के प्रति भाजपा के पुराने पूर्वाग्रह को उजागर करती है। भाजपा नेता ने बेशर्मी से कहा कि अगर पंजाब के लोग नरेंद्र मोदी को पसंद नहीं करते, तो उन्हें केंद्रीय योजनाओं के तहत मिला पैसा वापस कर देना चाहिए। धालीवाल ने इसे बेहद निचले स्तर का और अज्ञानता से भरा बयान करार दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब को मिलने वाला फंड भाजपा या प्रधानमंत्री का कोई “एहसान” नहीं है। पंजाब जीएसटी, टैक्स और अपने किसानों व उद्योगों की कड़ी मेहनत के जरिए देश के खजाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में, पंजाब को जो भी वित्तीय सहायता मिलती है, वह हमारा संवैधानिक अधिकार और हक है। यह न तो मोदी का निजी पैसा है और न ही यह भाजपा के दफ्तर से आता है।
‘आप’ नेता ने याद दिलाया कि पंजाब अभी भी अपने बकाया फंड का इंतजार कर रहा है, जिसमें केंद्र द्वारा रोका गया 800 करोड़ रुपये का आरडीएफ (RDF) फंड भी शामिल है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा द्वारा 1600 करोड़ रुपये के ऐलान के बावजूद, हाल ही में आई बाढ़ से हुए नुकसान के लिए पंजाब को उचित मुआवजा क्यों नहीं दिया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र हमारा पानी छीनने और हमारे संस्थानों को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, और अब उनके नेता ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बातें कर पंजाबियों का अपमान कर रहे हैं।
धालीवाल ने किसान आंदोलन के दौरान भाजपा के रवैये की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, “डेढ़ साल तक लाखों किसान दिल्ली की सड़कों पर बैठे रहे और 700 से ज्यादा किसान शहीद हो गए, लेकिन मोदी ने उनकी बात सुनने के लिए पांच मिनट का वक्त भी नहीं निकाला। आज वही भाजपा नेता पंजाबियों के अधिकारों पर सवाल उठाने की हिम्मत कर रहे हैं?”
गेजा राम के बयान को पंजाब का सीधा अपमान बताते हुए धालीवाल ने कहा कि यह भाजपा की पंजाब विरोधी विचारधारा को दर्शाता है। यह बयान न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि शर्मनाक भी है। ‘आप’ पंजाब इस मानसिकता की कड़ी निंदा करती है। पंजाब ने हमेशा देश से जितना लिया है, उससे कहीं ज्यादा दिया है, और देश के लिए हमारे योगदान पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।
गुरु तेग बहादुर जी का महान जीवन और दर्शन संपूर्ण मानवता के लिए प्रकाश स्तंभ : अरविंद केजरीवाल
श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर), 18 नवंबर live24india.com : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल आज यहां गुरुद्वारा छेवीं पातशाही में राज्य सरकार द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर आयोजित कीर्तन दरबार में सिख संगत के साथ शामिल हुए।
इक्ट्ठ को संबोधित करते हुए, ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक ने लोगों को गुरु जी के प्रेम, धर्मनिरपेक्षता, सहनशीलता, धार्मिक स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सार्वभौमिक संदेश का पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने इसे मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए गुरु साहिब के सर्वाेच्च बलिदान के संदेश को फैलाने का सार्थक अवसर बताया और कहा कि नौवें गुरु साहिब का जीवन और दर्शन विश्व के लिए प्रकाश स्तंभ बना हुआ है। अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने इस महान आयोजन को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाने के लिए विस्तृत प्रबंध किए हैं।
हम सौभाग्यशाली हैं हमें गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित समारोह करवाने की बख्शीश हुई : मुख्यमंत्री मान

‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब ने मानवता के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए अद्वितीय शहादत दी, ताकि दुनिया के सामने एक मिसाल कायम की जा सके। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दिल्ली में जो बलिदान दिया, वह विश्व इतिहास में बेमिसाल है।
‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि नौवें सिख गुरु जी धर्मनिरपेक्षता, एकता और विश्व भाईचारे के सच्चे प्रतीक थे। गुरु साहिब का जीवन और संदेश पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों का प्रमुख उद्देश्य लोगों को गुरु साहिब के महान जीवन, शहादत और मानवता के सदा रहने वाले संदेश के प्रति जागरूक करना है, जो विश्वभर में लाखों लोगों को प्रेरित करता है। अरविंद केजरीवाल ने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद की और 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक में शहीद हुए।
‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि कश्मीर के पंडित अपने धर्म की रक्षा हेतु सहायता मांगने गुरु तेग बहादुर जी के पास आए थे। उस समय के शासकों द्वारा कई प्रस्ताव देने के बावजूद गुरु जी ने अत्याचार के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए शहादत का मार्ग चुना। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी को दुनिया भर में पहले ऐसे शहीद के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने मानवाधिकारों के लिए अपना जीवन कुर्बान किया।
‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि विश्व इतिहास के पन्ने तपस्या, संयम, वीरता, बलिदान और सेवा के किस्सों से भरे पड़े हैं, लेकिन धार्मिक स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान ने मानव इतिहास में एक नया और अद्वितीय अध्याय लिखा है। उन्होंने कहा कि शासकों के अत्याचार के आगे झुकने की बजाय गुरु जी ने अपनी बेमिसाल शहादत से अत्याचारी हकूमत की जड़ों को हिला दिया। उन्होंने कहा कि नौवें पातशाह जी की शहादत से पहले गुरु साहिब के दादा, पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी ने भी मानवता और धर्म के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था।
इस दौरान अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हक, सत्य और धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान ने भारत के इतिहास को नया मोड़ दिया। उन्होंने कहा कि हम सिख धर्म में अपार श्रद्धा और विश्वास रखने वाले पंडित कृपा राम जी को श्रद्धांजलि और गहरा सम्माप अर्पित करते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि पंडित कृपा राम जी श्रीनगर से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित मट्टन कस्बे के निवासी थे, और उनकी अगुवाई में कश्मीरी पंडितों ने अपने धर्म की रक्षा हेतु गुरु तेग बहादुर जी से मदद की गुहार लगाई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गर्व और संतोष की बात है कि कश्मीरी पंडित भी श्रीनगर से निकाले जा रहे नगर कीर्तन में शामिल होंगे, जो भाईचारे और आपसी सद्भाव का सुंदर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि समूची मानवता की भलाई, सत्य और न्याय के लिए थे। भगवंत सिंह मान ने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के 24 साल बाद, वर्ष 1699 में श्री आनंदपुर साहिब की पावन धरा पर खालसा पंथ का उदय हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने धार्मिक मूल्यों की रक्षा और सम्मान के लिए अपना पूरा सर्वस्व न्योछावर कर दिया, जिसकी मिसाल विश्व इतिहास में कहीं और नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि अत्याचार, अन्याय और जुल्म के विरुद्ध लड़ने का साहस पंजाबियों को गुरु अर्जुन देव जी, गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोबिंद सिंह जी से विरासत में मिला है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि बलिदान की भावना हमारे खून में है और पंजाबी अपनी गौरवशाली विरासत पर गर्व करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महान अवसर को मनाने का उद्देश्य नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के दर्शन को संपूर्ण विश्व में अधिक से अधिक फैलाना है, ताकि गुरु जी के शांति, सद्भाव और धर्मनिरपेक्षता के आदर्शों को सहेजा जा सके। उन्होंने कहा कि जो कौमें अपनी विरासत को भूल जाती हैं, वे इतिहास के पन्नों से जल्द मिट जाती हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि जो कौमें अपनी विरासत से प्रेरणा लेकर शहीदों के दिखाये गये मार्ग पर आगे बढ़ती हैं, वे अंधकार में भी आशा की रोशनी खोज लेती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नौवें सिख गुरु साहिब एकता और धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थक थे, और उनका जीवन तथा शिक्षाएँ मानवता के लिए प्रकाश स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब के शहीदी दिवस को मनाने के लिए पंजाब सरकार ने राज्य के अंदर और बाहर कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गुरु जी के जीवन, दर्शन और धार्मिक स्वतंत्रता व मानवाधिकारों की रक्षा हेतु उनके बलिदान को शाश्वत रूप मे रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
अब नए बिजली कनेक्शनों के लिए एनओसी की आवश्यकता नहीं : कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा
चंडीगढ़, 18 नवंबर (live24india.com) : पंजाब के बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने पंजाब सरकार के एक अहम जनहितैषी फैसले का ऐलान करते हुए कहा कि पंजाब स्टेट पावर कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (पी.एस.पी.सी.एल.) अब आवेदकों द्वारा आवश्यक गारंटी जमा कराने के बाद बिना ऐतराज़हीनता प्रमाणपत्र (एनओसी) के ही बिजली कनेक्शन जारी करेगा।
उन्होंने कहा कि यह कदम माननीय राष्ट्रीय संयोजक श्री अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा नागरिकों को बिना किसी देरी के बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करवाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है ताकि कानूनी प्रक्रियाओं के पालन को सुनिश्चित किया जा सके।
श्री अरोड़ा ने कहा कि पहले, आवेदकों को बिजली कनेक्शन लेने से पहले स्थानीय प्राधिकरणों जैसे एम.सी., गमाडा, ग्लाडा, जे.डी.ए., ए.डी.ए., पी.डी.ए. या बी.डी.ए. द्वारा जारी एन.ओ.सी., रेगुलराइज़ेशन प्रमाणपत्र या स्वीकृत इमारत योजना जैसी अनुमतियाँ जमा करवानी पड़ती थीं। विभिन्न विभागों से इन अनुमतियों के उपलब्ध न होने या देर होने के कारण लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हमें एक व्यावहारिक समाधान खोजने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा, ‘‘आज वह समाधान लागू कर दिया गया है।’’
संशोधित हिदायतों के अनुसार, यदि आवेदक यह घोषणा (अंडरटेकिंग) देता है कि किसी भी सक्षम प्राधिकरण द्वारा भविष्य में इमारत को अवैध या अनधिकृत घोषित किए जाने की स्थिति में उसका बिजली कनेक्शन काटा जा सकता है, तो सप्लाई कोड 2024 के लागू प्रावधानों के तहत सभी आवेदकों को बिजली कनेक्शन जारी किये जाएंगे।
इसके अलावा, आवेदक को सप्लाई कोड 2024 के अनुसार भुगतान योग्य सभी सामान्य लागू खर्चों के अतिरिक्त, निपटान करने संबंधी खर्च (डिसमेंटलमेंट चार्ज) को कवर करने के लिए सुरक्षा राशि के रूप में सर्विस कनेक्शन चार्ज के बराबर राशि जमा करानी होगी।
श्री अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था जनसुविधा के साथ-साथ आवश्यक सुरक्षा उपायों को भी सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘मान सरकार का मानना है कि हर परिवार जरूरी सेवाओं तक पहुँच पाने का अधिकारी है। यह फैसला सुनिश्चित करता है कि कोई भी नागरिक बिजली सप्लाई से वंचित न रहे।’’
बिजली मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरे राज्य में पारदर्शिता और समान रूप से लागू किए जाने पर जोर देते हुए संशोधित दिशा-निर्देशों का कड़ाई व सावधानी से पालन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने आगे बताया कि बिजली कनेक्शन प्राप्त करने से संबंधित आवेदन फार्मों का सरलीकरण और रिकार्डों का डिजिटलीकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। इससे पहले, पी.एस.पी.सी.एल. ने यह फैसला किया था कि एल.टी. (लो टेंशन) श्रेणी के तहत 50 किलोवाट तक के लोड में नए कनेक्शन या बदलाव की मांग करने वाले आवेदकों या उपभोक्ताओं को भवन में बिजली कनेक्शन लगाने के लिए किसी लाइसेंसशुदा इलेक्ट्रिकल ठेकेदार से कोई टेस्ट रिपोर्ट या कोई स्व-प्रमाणनीकरण/दस्तख़त किए दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। इसकी बजाय, ऑनलाइन आवेदन फार्म में एक घोषणा शामिल होगी, जिसमें आवेदक यह घोषणा करेगा कि इमारत की आंतरिक वायरिंग किसी लाइसेंसशुदा इलेक्ट्रिकल ठेकेदार/सरकार द्वारा मनोनीत अधिकारी द्वारा लगाई और टैस्ट किया गया है तथा टेस्ट प्रमाणपत्र उसके पास उपलब्ध है।
पंजाब और पंजाबियों के हितों के लिए चट्टान की तरह खड़ा हूं, प्रदेश के हक़ नहीं छीनने दूंगा : CM भगवंत मान
प्रदेश के हितों की रक्षा करने की प्रतिबद्धता दोहराई
उत्तरी ज़ोनल काउंसिल की बैठक के दौरान पंजाब के मुद्दों की ज़ोरदार वकालत की
पंजाब के संसाधनों, राजधानी और नदी जल में अनावश्यक हिस्सेदारी मांगने के लिए हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की कड़ी आलोचना
नई दिल्ली, 18 नवंबर (live24india.com) : पंजाब और पंजाबियों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि मैं पंजाब और पंजाबियों के हितों के लिए चट्टान की तरह खड़ा हूं और किसी को भी पंजाब के हक़ छीनने की इजाज़त नहीं दूंगा।
आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कल उत्तरी ज़ोनल काउंसिल की 32वीं बैठक के दौरान सभी सदस्य राज्यों ने अपने-अपने मुद्दों पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश सहित अधिकांश राज्य पंजाब के हक़ों पर डाका डालने के लिए पूरी तरह तुले हुए थे। भगवंत सिंह मान ने कहा कि दुर्भाग्य से हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश हमारे हक़ छीनने के लिए अनुचित दबाव बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन राज्यों की गैर-जिम्मेदाराना नेतृत्व ने प्रदेश के संसाधनों और यहां तक कि नदी जल में हिस्सा मांगकर उत्तरी ज़ोनल काउंसिल जैसे प्रतिष्ठित मंच का मखौल उड़ाया है। उन्होंने कहा कि इस बैठक में सभी सदस्य राज्यों ने अपने विचार रखे और प्रदेश के मुखिया होने के नाते उन्होंने भी पंजाब का पक्ष रखा। भगवंत सिंह मान ने कहा कि कुल 28 एजेंडा आइटम में से 11 पंजाब से संबंधित थे और पहली बार प्रदेश सरकार के सख्त प्रयासों के कारण इन सभी को स्थगित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये मुद्दे वास्तव में अकाली, भाजपा और कांग्रेस की पिछली सरकारों द्वारा पंजाब और इसके लोगों के लिए बोए गए कांटे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इन मुद्दों को हल करने के लिए कड़े प्रयास कर रही है। भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब सरकार प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग नदी जल को लेकर हंगामा कर रहे हैं, उन्हें एक बात समझ लेनी चाहिए कि नदी जल की वास्तविक उपलब्धता का वास्तविक समय मूल्यांकन किया जाना चाहिए, जिसके लिए पानी की मौजूदगी की समीक्षा की जानी चाहिए। नदी जल, राजधानी, पंजाब यूनिवर्सिटी और हेडवर्क्स के बारे में बोलते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह दुखद है कि हर दूसरा राज्य पंजाब के अधिकारों में हिस्सा मांग रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश सरकार पंजाब के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि हरियाणा ने बहुत अजीब मांग की है कि पंजाब को भाखड़ा मेन लाइन (बी.एम.एल.) पर मिनी हाइडल प्रोजेक्ट बनाने से रोका जाए क्योंकि इससे पानी के प्रवाह में रुकावट आएगी। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि हरियाणा का भोला नेतृत्व ऐसे निराधार और तथ्यों से दूर मुद्दे खड़े कर रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि सतलुज-यमुना लिंक (एस.वाई.एल.) का मुद्दा केवल यमुना-सतलुज लिंक (वाय.एस.एल.) के माध्यम से ही हल किया जा सकता है, जो यमुना के पानी का समझदारी से उपयोग सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब के पास एस.वाई.एल. के जरिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है और पानी की उपलब्धता का वैज्ञानिक आधार पर हिसाब नहीं लगाया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है और इस बारे में सवाल ही पैदा नहीं होता। पानी से संबंधित मुद्दे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडस वाटर ट्रीटी रद्द होने के परिप्रेक्ष्य में संबंधित राज्यों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी को देखते हुए यह पानी से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एक अच्छा अवसर है। उन्होंने कहा कि चेनाब नदी को रावी और ब्यास नदियों से जोड़ने की संभावना है, जिसके लिए हमारे पास पहले से ही पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले डैम मौजूद हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि चेनाब को रावी-ब्यास से जोड़ने पर अतिरिक्त पानी को निचले राज्यों द्वारा बिजली उत्पादन और सिंचाई दोनों उद्देश्यों के लिए लाभकारी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान से बी.बी.एम.बी. में स्थायी सदस्य की नियुक्ति के मुद्दे पर पंजाब ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि बी.बी.एम.बी. पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत गठित संस्था है जो केवल उत्तराधिकारी राज्यों पंजाब और हरियाणा से संबंधित है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने पहले ही सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक पैनल प्रस्तुत किया है और भारत सरकार को पंजाब और हरियाणा से एक-एक सदस्य की मूल व्यवस्था को जारी रखना चाहिए क्योंकि पूर्णकालिक अतिरिक्त पद से न केवल खर्च बढ़ेगा जिसे बिना किसी उद्देश्य के पंजाब को वहन करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने की जोरदार अपील की थी और कहा था कि प्रदेश के पुनर्गठन के बाद 1970 के इंदिरा गांधी समझौते में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि “चंडीगढ़ का राजधानी प्रोजेक्ट क्षेत्र पूरी तरह पंजाब को जाएगा”, जो केंद्र सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता थी। उन्होंने कहा कि 24 जुलाई 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और संत हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच हुए राजीव-लोंगोवाल समझौते ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की थी कि चंडीगढ़ पंजाब को सौंप दिया जाएगा। भगवंत सिंह मान ने अफसोस जताते हुए कहा कि सभी वादों के बावजूद चंडीगढ़ पंजाब को नहीं सौंपा गया जिससे हर पंजाबी के मन को ठेस पहुंची है।
चंडीगढ़ यूटी के कामकाज में पंजाब और हरियाणा के सेवा कर्मचारियों की भर्ती के 60:40 अनुपात को बनाए रखने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को चंडीगढ़ प्रशासन में प्रमुख पदों से बाहर रखा जा रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि आबकारी, शिक्षा, वित्त और स्वास्थ्य जैसे विभागों में पदों को स्टेट यूटी कैडर (डीएएनआईसीएस) जैसे कैडरों के लिए खोला जा रहा है, जिससे यूटी प्रशासन के प्रभावी कामकाज में पंजाब राज्य की भूमिका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अन्य संबंधित मुद्दा पंजाब कैडर के अधिकारियों को जनरल मैनेजर एफ.सी.आई. (पंजाब) के पद पर तैनात करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र पूल में पंजाब राज्य के लगातार बड़े योगदान को देखते हुए भारत सरकार को पंजाब कैडर के आई.ए.एस. अधिकारी को एफ.सी.आई. के क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात करने की स्थापित परंपरा को नहीं तोड़ना चाहिए। भगवंत सिंह मान ने कहा कि एम.डी. सिटको का पद पहले से पंजाब कैडर के आई.ए.एस. अधिकारी के पास रहा है, जबकि अब यू.टी. स्टेट सर्विस अधिकारियों को इस पद पर तैनात किया जा रहा है, जो चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में पंजाब और हरियाणा से कर्मचारियों की भर्ती के निर्धारित 60:40 अनुपात के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को लगभग 13,500 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ है फिर भी हम राष्ट्रीय खाद्य पूल में 150 लाख मीट्रिक टन (एल.एम.टी.) चावल का योगदान दे रहे हैं। भगवंत सिंह मान ने रोपड़, हरिके और फिरोजपुर हेडवर्क्स का नियंत्रण बीबीएमबी को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव का भी विरोध किया क्योंकि ये हेडवर्क्स पूरी तरह पंजाब के अंदर स्थित हैं और हमेशा राज्य द्वारा संचालित एवं रखरखाव किए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कहीं भी किसी राज्य के हेडवर्क्स को किसी बाहरी एजेंसी द्वारा नहीं चलाया जा रहा और यदि हेडवर्क्स का नियंत्रण भी पंजाब से छीन लिया जाता है तो प्रदेश को बाढ़ से निपटने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बीएसएफ और सेना की सीमा चौकियों (बीओपी) पर बाढ़ सुरक्षा कार्यों को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को अभी तक केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी है और आगे कहा कि भारत सरकार को बिना किसी शर्त के पूरे फंड जारी करने चाहिए क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है।
इस दौरान भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी का पंजाब के लोगों से गहरा नाता है, जिसे विभाजन के बाद लाहौर से पंजाब के होशियारपुर और फिर इसकी राजधानी चंडीगढ़ में स्थापित किया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा और हिमाचल प्रदेश ने क्रमशः 1973 और 1975 में अपनी मर्जी से पंजाब यूनिवर्सिटी से अपने कॉलेज वापस ले लिए और अपनी अलग यूनिवर्सिटी स्थापित कर लीं तथा पंजाब यूनिवर्सिटी को फंड देना बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 50 सालों से केवल पंजाब ही इस यूनिवर्सिटी का समर्थन और प्रबंधन कर रहा है, लेकिन अब इस स्तर पर उन्हें समझ नहीं आ रहा कि हरियाणा अपने कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी से फिर क्यों जोड़ना चाहता है, जबकि वे पिछले 50 साल से कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी (जो ए+ एनएएएसी मान्यता प्राप्त है) से संबद्ध हैं। भगवंत सिंह मान ने पंजाब सरकार के रुख को दोहराया कि पंजाब यूनिवर्सिटी के दर्जे में किसी भी तरह का बदलाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी हमारी यूनिवर्सिटी है और हम भविष्य में भी इसका समर्थन और फंडिंग जारी रखेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के दबाव में झुकते हुए केंद्र सरकार ने अपना नोटिफिकेशन वापस ले लिया है लेकिन इस मुद्दे पर कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने सीनेट और सिंडिकेट में पीछे के दरवाजे से घुसने की कोशिश के लिए हरियाणा की भी निंदा की और कहा कि यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भगवंत सिंह मान ने कहा कि हरियाणा को ऐसी घटिया कोशिशों से अपने नापाक मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
इस मौके पर मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और अन्य उपस्थित थे।
सराभा गांव पहुंचे मुख्यमंत्री, शहीद करतार सिंह सराभा को अर्पित की श्रद्धांजलि; गांव में विकास के लिए 45 करोड़ की घोषणा की
लुधियाना : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान महान क्रांतिकारी शहीद करतार सिंह सराभा के शहीदी दिवस पर सराभा गाँव पहुँचे। उन्होंने करतार सिंह सराभा को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री मान ने सबसे पहले गाँव के सराभा चौक पर स्थित शहीद करतार सिंह सराभा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद वे गाँव के पार्क में गए और अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि समारोह के दौरान, वे शहीद सराभा के घर भी गए। उन्होंने शहीद की प्रतिमा पर सिरोपा चढ़ाया और उन्हें नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मान ने कमरे में प्रदर्शित तस्वीरों और पुरानी वस्तुओं का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले क्रांतिकारी योद्धाओं को उनके साहस और देश प्रेम के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

आपको बता दें कि गाँव में श्रद्धांजलि समारोह के बाद, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी खिलाड़ियों से मुलाकात की। उन्होंने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उनकी हालिया जीत पर उन्हें बधाई दी।

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ਸ਼ਹੀਦਾਂ ਦੀ ਪਵਿੱਤਰ ਧਰਤੀ ਲਈ ਦਿਲੋਂ ਸਤਿਕਾਰ!
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🔸 ਸ਼ਹੀਦ ਕਰਤਾਰ ਸਿੰਘ ਸਰਾਭਾ ਜੀ ਦੀ ਬਰਸੀ 'ਤੇ ਅੱਜ CM @BhagwantMann ਪਹੁੰਚੇ ਪਿੰਡ ਸਰਾਭਾ
🔸 ਸ਼ਹੀਦ ਸਰਾਭਾ ਜੀ ਨੂੰ ਸ਼ਰਧਾਂਜਲੀ ਭੇਟ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਪਿੰਡ ਅਤੇ ਇਲਾਕੇ ਲਈ ਦਿੱਤੇ ₹45.84 ਕਰੋੜ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ
🔸 ਹਾਜ਼ਰ ਸੰਗਤ ਨੂੰ ਦਿੱਤਾ ਨੌਵੇਂ ਪਾਤਸ਼ਾਹ ਜੀ ਦੇ 350ਵੇਂ ਸ਼ਹੀਦੀ… pic.twitter.com/uJjX3fherP
मान कैबिनेट के बड़े फैसले : श्री आनंदपुर साहिब में होगा विशेष सत्र, 2700+ भर्तियों और नई प्लॉट नीति को हरी झंडी
चंडीगढ़ : पूरे राज्य में स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को और मजबूत करने के मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने आज स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 311 नर्सों की भर्ती को मंजूरी दे दी है। यह फैसला आज यहां मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि यह फैसला मरीजों की देखभाल संबंधी सेवाओं में सुधार लाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता बढ़ाने के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह फैसला अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में मानव संसाधन के प्रमुख अंतर को भरने की व्यापक योजना का हिस्सा है। इसके अलावा वर्तमान में 400 से अधिक अन्य नर्सों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्वास्थ्य सुविधा में गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग देखभाल सेवाएं देने के लिए पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध हो। बताया गया है कि ये नर्सें दिसंबर के पहले सप्ताह से पहले जॉइन कर लेंगी।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने प्राथमिक और ट्रशरी स्तर पर स्वास्थ्य पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से पहले ही 800 डॉक्टरों की भर्ती पूरी कर ली है। इसमें बाल रोग, मेडिसिन, प्रसूति एवं स्त्री रोग तथा सर्जरी सहित प्रमुख क्षेत्रों में 175 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टर पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ और पेशेवर सेवाएं मजबूत हुई हैं। ये कदम सामूहिक रूप से पंजाब के हाल के इतिहास में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी भर्ती मुहिम की गवाही देते हैं, जिनका उद्देश्य समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है।
सी.डी.पी.ओज. के 16 रिक्त पदों को बहाल करने की मंजूरी
मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा, महिलाएं एवं बच्चे से संबंधित राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सी.डी.पी.ओ.) के 16 रिक्त पदों को बहाल करके पी.पी.एस.सी. के माध्यम से भर्ती की मंजूरी भी दे दी है। सी.डी.पी.ओ. आई.सी.डी.एस., पोषण, सामाजिक सुरक्षा और महिला कल्याण के अंतर्गत प्रमुख योजनाओं के लिए जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन करने वाले प्रमुख अधिकारी हैं और हर ब्लॉक के लिए एक सी.डी.पी.ओ. की आवश्यकता होती है। यह बहाली ब्लॉक स्तर पर उचित स्टाफ सुनिश्चित करेगी, जिससे कल्याण योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन, फील्ड निगरानी में प्रशासनिक कमी को पूरा करना और आईसीडीएस/पोषण के अंतर्गत कार्यक्रम नियमों का पालन सुनिश्चित होगा।
CM @BhagwantMann ਦੀ ਅਗਵਾਈ ‘ਚ ਹੋਈ ਪੰਜਾਬ ਕੈਬਨਿਟ ਦੀ ਅਹਿਮ ਮੀਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਕਈ ਅਹਿਮ ਫ਼ੈਸਲਿਆਂ ‘ਤੇ ਲੱਗੀ ਮੋਹਰ
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👉BBMB ਵਿੱਚ ਤੈਨਾਤ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ 2458 ਕਰਮਚਾਰੀਆਂ ਦਾ ਵੱਖਰਾ ਕੈਡਰ ਸਿਰਜਣ ਨੂੰ ਹਰੀ ਝੰਡੀ
👉24 ਨਵੰਬਰ ਨੂੰ ਪੰਜਾਬ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੈਸ਼ਨ ਸੱਦਣ ਲਈ ਮਨਜ਼ੂਰੀ
👉 ਸਿਹਤ ਅਤੇ ਪਰਿਵਾਰ ਭਲਾਈ ਵਿਭਾਗ 'ਚ… pic.twitter.com/aS4YPkyr10
2458 कर्मचारियों का अलग कैडर बनाने को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधकीय बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) में तैनात किए जाने वाले 2458 कर्मचारियों के लिए अलग कैडर बनाने को भी हरी झंडी दे दी है। देखा गया है कि बी.बी.एम.बी. में पंजाब कोटे की बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जिस कारण बोर्ड ने अपने कैडर से पंजाब कोटे के पद भर लिए थे। मंत्रिमंडल ने विभिन्न विभागों के लिए इन भर्तियों हेतु 2458 पद सृजित करने तथा विभिन्न विभागों के पदों के संबंध में नियम अपनाने की मंजूरी दे दी है।
प्रशासनिक पदों के लिए सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की गई
मंत्रिमंडल ने मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में मेडिकल टीचिंग फैकल्टी से पदोन्नति द्वारा भरे जाने वाले प्रशासनिक पदों के लिए सेवानिवृत्ति आयु वर्तमान 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने को भी मंजूरी दे दी है। पहले मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में मेडिकल टीचिंग फैकल्टी की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष थी, लेकिन भारत सरकार के संस्थानों के अलावा पड़ोसी राज्यों हरियाणा और चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश) में यह 65 वर्ष है। यह कदम फैकल्टी रिटेंशन और संस्थागत स्थिरता को मजबूत करने, मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के दौरान मेडिकल शिक्षा वातावरण को सुदृढ़ करने तथा मरीज देखभाल सेवाओं में सुधार और अकादमिक नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
24 नवंबर को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने पर सहमति
मंत्रिमंडल ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को मनाने के लिए यादगारी समारोहों के हिस्से के रूप में 16वीं पंजाब विधानसभा का 10वां (विशेष) सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाने पर भी सहमति जताई। यह सत्र 24 नवंबर को पवित्र शहर के भाई जैता जी मेमोरियल में होगा।
सुरक्षित मासिक धर्म के लिए ‘नई दिशा’ योजना शुरू करने को हरी झंडी
मंत्रिमंडल ने किशोरावस्था की लड़कियों और जरूरतमंद महिलाओं को सुरक्षित मासिक धर्म एवं मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने के लिए ‘नई दिशा’ योजना शुरू करने को भी मंजूरी दे दी है। यह योजना जागरूकता, शिक्षा, व्यवहार परिवर्तन और जरूरतमंद महिलाओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन वितरण पर केंद्रित होगी। इस योजना के तहत 15-44 वर्ष की आयु की सभी मासिक धर्म वाली महिलाओं, विशेषकर स्कूल ड्रॉपआउट लड़कियों, बीपीएल वर्ग की महिलाओं, झुग्गी-झोपड़ी वालों, घुमंतू समुदायों और निराश्रित महिलाओं जैसे जरूरतमंद समूहों को नैपकिन की मुफ्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
डेंटल टीचिंग फैकल्टी की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाई
मंत्रिमंडल ने मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में डेंटल टीचिंग फैकल्टी/डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने को भी मंजूरी दे दी है। इससे प्रदेश के डेंटल कॉलेजों में टीचिंग फैकल्टी की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी। यह फैसला विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मरीजों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के हित में है तथा डेंटल कॉलेजों में कार्यरत टीचिंग फैकल्टी/डॉक्टरों की मांग को पूरा करेगा।
सी.एच.सी. दोराहा में विभिन्न कैडर की 51 नई पदों की सृजन को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने दोराहा के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में 30 बेड वाले अस्पताल को कार्यात्मक बनाने के लिए विभिन्न कैडर की 51 नई पदों की सृजन को भी मंजूरी दे दी है। इनमें डॉक्टरों के 11, ग्रुप-बी के 2, फार्मासिस्ट, नर्सों और क्लर्कों के 30 तथा वार्ड सर्वेंट और स्वीपर के 8 पद शामिल हैं।
इन नई पदों से दोराहा शहर और आसपास के गांवों के लोगों को कुशल और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच मिलेगी।
मालेरकोटला में खेल विभाग, पंजाब के लिए नई पदों की सृजन को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने नए बने जिले मालेरकोटला में खेल विभाग, पंजाब के लिए तीन नई पदों (सीनियर असिस्टेंट, स्टेनो-टाइपिस्ट और क्लर्क) की सृजन को भी मंजूरी दे दी है। ये पद विभाग के सुचारु कार्य संचालन को सुनिश्चित करेंगे। इससे खेलों को प्रोत्साहन और युवाओं को नशे की लत से दूर रखने में मदद मिलेगी।
पुडा के औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन के लिए नीति को हरी झंडी
मंत्रिमंडल ने आवास एवं शहरी विकास विभाग द्वारा औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन/उप-विभाजन के लिए जारी नीति के तर्ज पर तैयार की गई नीति को भी लागू करने की मंजूरी दे दी।
राज्य में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग तथा आवास एवं शहरी विकास विभाग के अंतर्गत औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन/उप-विभाजन में समानता लाना महत्वपूर्ण है। इसके तहत औद्योगिक प्लॉटों को दो या दो से अधिक छोटी इकाइयों में विभाजित करने की अनुमति होगी, बशर्ते प्रत्येक विभाजित प्लॉट का न्यूनतम क्षेत्रफल 500 वर्ग गज से कम न हो।
गैर-सूचीबद्ध संपत्तियों के लिए नीति को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट (पी.एल.पी.ए.) के तहत गैर-सूचीबद्ध जमीनों के लिए नीति को भी मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य मौजूदा ढांचों को नियमित करने के लिए मानकीकृत और पारदर्शी ढांचा स्थापित करना तथा इन गैर-सूचीबद्ध जमीनों पर नई कम-प्रभाव वाली आवासीय इकाइयों की अनुमति देना है। इसके लिए प्लॉट का न्यूनतम आकार 4,000 वर्ग गज अनिवार्य है तथा कम एफ.ए.आर., सीमित साइट कवरेज, जी+1 संरचनाओं पर प्रतिबंध जैसे सख्त नियंत्रण शामिल हैं। नीति का मुख्य सिद्धांत किसी भी व्यावसायिक गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध है। पर्यावरण संरक्षण के लिए देशी प्रजातियों के पेड़ लगाना, टिकाऊ निर्माण सामग्री का उपयोग, वर्षा जल संचयन और सौर ऊर्जा के प्रावधान जैसे मजबूत सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं।
मान सरकार के बड़ा एक्शन, संगरूर में दो नशा तस्करों के घर पर चलाया बुलडोजर; दोनों के खिलाफ 11 केस दर्ज थे
संगरूर | पंजाब को रंगला पंजाब बनाने और नशे को जड़ से खतम करने के लिए सरकार एक्शन मोड में है। वहीं, अब संगरूर में दो नशा तस्करों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया है।
जानकारी के अनुसार संगरूर के ही रहने वाले राजपाल सिंह और रत्तो के घर पर बुलडोजर चला है। ये दोनों पति-पत्नी हैं और इनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत 11 केस दर्ज थे। वहीं, दूसरा मकान लखो नामक व्यक्ति का था, जिसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत चार केस दर्ज थे, जो 2018 से लंबित थे। अधिकारियों ने बताया कि ये मकान अवैध रूप से बनाए गए थे। जिनको बुलडोजर के द्वारा ध्वस्त कर दिया गया है।

मान सरकार का कहना है कि वह राज्य में नशे को जड़ से खतम कर देंगे। उनका कहना है कि अगर कोई नशा बेच रहा है तो सुधर जाए, नहीं तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। सरकार द्वारा ‘सेफ पंजाब’ एंटी-ड्रग हेल्पलाइन 97791-00200 भी जारी किया गया है।

'ਯੁੱਧ ਨਸ਼ਿਆਂ ਵਿਰੁੱਧ' ਮੁਹਿੰਮ ਤਹਿਤ ਸੰਗਰੂਰ ਵਿਖੇ ਚੱਲਿਆ ਬੁਲਡੋਜ਼ਰ https://t.co/2L383DY2Ho
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दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ेगी AAP, केजरीवाल ने कहा- कोई गठबंधन नहीं होगा
नई दिल्ली : दिल्ली में विधानसभा चुनावों को लेकर सियासत गर्माती नजर आ रही है। वहीं, गठबंधन के सवाल पर केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा।
केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में पार्टी यहां अकेले ही चुनाव लड़ेगी और सभी 70 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि, इससे पहले, दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भी क्लियर किया था कि वह आप से गठबंधन नहीं करेंगे। बता दें, आप और कांग्रेस विपक्षी इंडी गठबंधन का हिस्सा हैं और इस साल की शुरुआत में दिल्ली में लोकसभा चुनाव में दोनों एक साथ लड़े थे। हालांकि इसमें दोनों पार्टियों को कोई भी सीट नहीं मिली और बीजेपी ने सभी सीटें जीत लीं। वहीं, कई दौर की बातचीत के बावजूद अक्टूबर में हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले AAP और कांग्रेस सीट-बंटवारे के समझौते पर पहुंचने में विफल रहे थे और दोनों अलग-अलग चुनाव लड़े थे।
शीतकालीन सत्र शुरू : मुट्ठीभर लोगों की हुड़दंगबाजी से संसद को कंट्रोल करने का लगातार प्रयास कर रहे : PM मोदी
नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र के शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मीडिया को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि शीतकालीन सत्र में माहौल शीत रहेगा। पीएम मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “शीतकालीन सत्र है और माहौल भी शीत ही रहेगा। 2024 का ये अंतिम कालखंड चल रहा है, देश उमंग और उत्साह के साथ 2025 के स्वागत की तैयारी में भी लगा हुआ है।”
संसद का ये सत्र अनेक प्रकार से विशेष है। सबसे बड़ी बात है कि हमारे संविधान की यात्रा का 75वें साल में प्रवेश अपने आप में लोकतंत्र के लिए एक बहुत ही उज्जवल अवसर है। कल संविधान सदन में सब मिलकर संविधान के 75वें वर्ष के उत्सव की शुरुआत करेंगे। संविधान निर्माताओं ने संविधान का निर्माण करते समय एक एक बिंदु पर बहुत विस्तार से बहस की है और तब जाकर ऐसा उत्तम दस्तावेज हमें प्राप्त हुआ है। हमारे संविधान की महत्वपूर्ण इकाई- संसद और हमारे सांसद हैं। पार्लियामेंट में स्वस्थ चर्चा हो, ज्यादा से ज्यादा लोग चर्चा में अपना योगदान दें।”
पीएम मोदी ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए संसद को भी मुट्ठी भर लोगों की हुड़दंगबाजी से कंट्रोल करने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनका अपना मकसद तो सफल नहीं होता, लेकिन देश की जनता उनके सारे व्यवहार देखती है और जब समय आता है तो उन्हें सजा भी देती है, लेकिन सबसे पीड़ादायक बात यह है कि नए सांसद नए विचार, नई ऊर्जा लेकर आते हैं और वे किसी एक पार्टी के नहीं, बल्कि सभी पार्टियों के होते हैं।
दुर्भाग्य से कुछ लोगअपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए संसद को भी मुट्ठीभर लोगों की हुड़दंगबाजी से संसद को कंट्रोल करने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।
— BJP (@BJP4India) November 25, 2024
उनका अपना मकसद तो सफल नहीं होता, लेकिन देश की जनता उनके सारे व्यवहार देखती है और जब समय आता है तो उन्हें सजा भी देती है।
– पीएम… pic.twitter.com/ufmkxkmqhc
As the Winter Session of the Parliament commences, I hope it is productive and filled with constructive debates and discussions.https://t.co/X6pmcxocYi
— Narendra Modi (@narendramodi) November 25, 2024
