कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। INDIA ब्लॉक के प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट मार्च से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि सरकार ज्ञानेश कुमार को बचा रही है। Rahul Gandhi ने कहा कि विपक्ष का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवालों को लेकर जारी रहेगा।
Rahul Gandhi के मुताबिक, विपक्षी दलों का यह मार्च केवल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की मुहिम है। उन्होंने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, विपक्ष पीछे नहीं हटेगा। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रतिबंधों और प्रदर्शनकारियों को रोकने के कथित प्रयासों पर भी सवाल उठाए।
ज्ञानेश कुमार को लेकर Rahul Gandhi ने उठाए सवाल
Rahul Gandhi ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि लोग सवाल उठा रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं।
राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकार ज्ञानेश कुमार को जितना बचाने की कोशिश करेगी, विपक्ष उतना ही उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास करेगा, जिन्हें वह इस मामले में जिम्मेदार मानता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनकी सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त को बचा रही है।
Rahul Gandhi ने कहा कि वह प्रधानमंत्री को बताना चाहते हैं कि सरकार के 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और उन्हें जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को लेकर भी एक टिप्पणी की और कहा कि वह रात में सो नहीं पा रहे हैं। यह राहुल गांधी का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है।
‘शिवजी की बारात की तरह है विपक्ष का मार्च’
INDIA ब्लॉक के मार्च को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि इसमें कोई भी शामिल हो सकता है। उन्होंने इसे शिवजी की बारात जैसा बताते हुए कहा कि यह आंदोलन सरकार से लड़ाई के बजाय संविधान बचाने की मुहिम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष न्याय मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं है। कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक के विभिन्न विपक्षी दलों ने ‘चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के तहत सुप्रीम कोर्ट तक जाने की योजना बनाई है।
Rahul Gandhi ने बताया कि विपक्षी नेता इस दौरान अदालत में याचिका भी दायर करेंगे। उनके अनुसार, इस कदम का उद्देश्य चुनाव की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से संबंधित चिंताओं को अदालत के सामने रखना है।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और यातायात पर सवाल
राहुल गांधी ने प्रदर्शन से पहले दिल्ली में की गई सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी को किले में तब्दील कर दिया गया है और लोगों को दिल्ली पहुंचने से रोका जा रहा है।
उन्होंने ट्रेन और बस सेवाओं को रोके जाने का भी दावा किया। राहुल गांधी ने सवाल किया कि दिल्ली को जेल जैसा क्यों बनाया जा रहा है और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर इस तरह की पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं।
Rahul Gandhi ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि सड़कों पर 20,000 से 30,000 पुलिसकर्मी तैनात हों, ताकि प्रदर्शन के दौरान स्थिति सामने आ सके। हालांकि, पुलिस बल की तैनाती और यातायात पर लगाए गए प्रतिबंधों के संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है।
पुलिस और सुरक्षा बलों को लेकर भी किया दावा
Rahul Gandhi ने दावा किया कि कई पुलिसकर्मी उनसे कह रहे हैं कि विपक्ष जो कर रहा है, वह सही है और आंदोलन जारी रहना चाहिए। उन्होंने पुलिस, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और देश की जनता को एक तरफ बताते हुए केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं और चुनाव आयोग के कुछ अधिकारियों पर आरोप लगाए।
उन्होंने नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अजीत डोभाल और ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए कहा कि उनके अनुसार ये लोग वोट चोरी और देश को हाईजैक करने में मदद कर रहे हैं।
ये सभी राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। उपलब्ध सामग्री में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित व्यक्तियों की प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसलिए इन्हें आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश को लिखी चिट्ठी का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने और कांग्रेस अध्यक्ष ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर लोकतंत्र और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई थी। उनके अनुसार, मुख्य न्यायाधीश की ओर से जवाब मिला था और उन्हें याचिका दायर करने के लिए कहा गया था।
राहुल गांधी ने कहा कि INDIA ब्लॉक के नेता उनके साथ सुप्रीम कोर्ट जाकर याचिका दायर करेंगे। उन्होंने इसे चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवालों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाने का कदम बताया।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की ओर से मुलाकात के अनुरोध पर प्रतिक्रिया भी सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया को बताया कि उन्हें पिछले दिन बैठक के अनुरोध से संबंधित पत्र मिला था और उन्होंने उसी रात जवाब भेज दिया था। उन्होंने जवाब में मुलाकात नहीं कर पाने के कारणों का उल्लेख किया था।
इस घटनाक्रम के बीच विपक्ष की ओर से प्रस्तावित मार्च और याचिका की कार्रवाई महत्वपूर्ण है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि विपक्ष अदालत में क्या मांग रखता है और संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
