संजय दत्त स्टारर फिल्म ‘आख़री सवाल’ रिलीज से पहले ही चर्चा और सस्पेंस का केंद्र बन गई है। फिल्म की रिलीज डेट नजदीक होने के बावजूद सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में हो रही देरी ने इंडस्ट्री में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर फिल्मों के लिए समय पर सर्टिफिकेशन बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि यही प्रक्रिया तय करती है कि फिल्म तय समय पर सिनेमाघरों तक पहुंचेगी या नहीं।
मिली जानकारी के अनुसार, फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद 72 घंटे के भीतर सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की प्रतिक्रिया आनी चाहिए थी, लेकिन चार दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। इस देरी ने न सिर्फ मेकर्स बल्कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और एग्जीबिटर्स की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।
ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में फिल्मों की रिलीज प्लानिंग महीनों पहले की जाती है। ऐसे में सर्टिफिकेशन में छोटी सी देरी भी पूरे मार्केटिंग कैंपेन, प्रमोशन रणनीति और थिएटर बुकिंग पर असर डाल सकती है। एक डिस्ट्रीब्यूशन कंसल्टेंट के मुताबिक, “रिलीज से ठीक पहले आने वाली अनिश्चितता फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन को सीधे प्रभावित कर सकती है।”
हालांकि, ‘आख़री सवाल’ को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह कम नहीं हुआ है। फिल्म के टीज़र को मिला पॉजिटिव रिस्पॉन्स और इसके विषय को लेकर बनी जिज्ञासा लगातार इसका बज़ बनाए हुए है। यही वजह है कि देरी के बावजूद फिल्म चर्चा में बनी हुई है।
यह मामला सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या सर्टिफिकेशन प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी हो रही है? फिल्म निर्माताओं का मानना है कि सेंसर प्रक्रिया में गहन जांच जरूरी है, लेकिन इसके साथ समयबद्ध निर्णय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल ‘आख़री सवाल’ के सर्टिफिकेशन को लेकर स्थिति साफ नहीं है और फिल्म की अगली अपडेट का इंतजार किया जा रहा है। इंडस्ट्री की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि CBFC कब अपना फैसला सुनाता है और क्या यह मामला भविष्य में सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में किसी बदलाव की दिशा तय करेगा।
