नई दिल्ली, 15 अगस्त : देश ने 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रीय उत्साह और देशभक्ति के माहौल में मनाया। नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा फहराकर राष्ट्रीय समारोह की अगुवाई की। इसके बाद उन्होंने देश को संबोधित किया। इस वर्ष उनके भाषण में आत्मनिर्भरता, वैश्विक संकटों के बीच भारत की तैयारी, किसानों के लिए खाद की उपलब्धता, उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात प्रमुख विषय रहे।
इस बार का स्वतंत्रता दिवस ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के कारण भी विशेष रहा। लाल किले की प्राचीर पर फूलों की सजावट के बीच तिरंगा प्रमुख रूप से नजर आया। उसके दोनों ओर हिंदी में ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया। इससे समारोह में स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय विरासत से जुड़ा एक विशेष भाव भी दिखाई दिया।
लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने दिया आत्मनिर्भरता का संदेश
तिरंगा फहराने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पिछले वर्षों के दौरान देश की तैयारियों और उपलब्ध क्षमताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट तक दुनिया ने कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे समय में भारत ने अपनी जरूरतों को पूरा करने और मुश्किल परिस्थितियों से निपटने की क्षमता बनाए रखी है।
प्रधानमंत्री ने उन आशंकाओं का भी जिक्र किया, जिनके जरिए संकट के समय लोगों के बीच डर का माहौल पैदा होने की बात कही गई। उन्होंने टीके, गैस, डीजल और खाद की उपलब्धता से जुड़े सवालों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी आपूर्ति व्यवस्था को संभाले रखा।
पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद की उपलब्धता का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, गैस और यूरिया जैसी जरूरी वस्तुएं उपलब्ध हैं। उनके अनुसार, पिछले 10 से 12 वर्षों में की गई तैयारियों और योजनाओं का असर यह है कि बड़े वैश्विक संकटों के बावजूद देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की स्थिति में है।
किसानों से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने यूरिया और डीएपी की कीमतों का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमत 3000 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि किसानों को यह 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह उन्होंने कहा कि डीएपी की वैश्विक कीमत 5000 रुपये तक पहुंचने के बावजूद किसानों के लिए इसकी कीमत 1350 रुपये रखी गई है।
इन आंकड़ों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने खाद की उपलब्धता को कृषि क्षेत्र और राष्ट्रीय तैयारी से जोड़ने का प्रयास किया। उनका संदेश यह रहा कि संकट के समय जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखना देश की आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

वैश्विक संकटों के बीच आत्मनिर्भरता को बताया जरूरी
प्रधानमंत्री के भाषण का एक प्रमुख हिस्सा आत्मनिर्भरता पर केंद्रित रहा। उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर पैदा होने वाले दबावों का जिक्र किया। उनके अनुसार, पेट्रोल, डीजल, दवाइयां और जमीन जैसे संसाधन भी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में रणनीतिक महत्व रखते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि भारत ने पहले से आत्मनिर्भरता की दिशा में तैयारी नहीं की होती, तो ऐसे संकटों का सामना करना अधिक कठिन हो सकता था। इस संदर्भ में उन्होंने देश की आंतरिक उत्पादन क्षमता, जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और मजबूत आपूर्ति व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उनके संबोधन में आत्मनिर्भरता को केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा से भी जोड़ा गया। इसका अर्थ यह है कि भारत को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता कम करने के साथ अपनी उत्पादन क्षमता भी लगातार बढ़ानी होगी।
व्यापार समझौतों को भारतीय उद्योग के लिए अवसर बताया
प्रधानमंत्री ने व्यापार समझौतों को भारतीय उद्योग के लिए नए अवसरों के रूप में देखने की अपील की। उन्होंने खास तौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों से इन अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने भारतीय उद्योगों को दुनिया में उपलब्ध उत्पादों की तुलना में बेहतर और सस्ते उत्पाद तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। इससे साफ है कि सरकार आत्मनिर्भरता को केवल घरेलू बाजार की जरूरतों से जोड़कर नहीं देख रही, बल्कि भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
उत्पादन की गुणवत्ता, लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा इस संदेश के महत्वपूर्ण हिस्से रहे। आने वाले समय में भारतीय उद्योगों के लिए यह चुनौती होगी कि वे घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप गुणवत्ता और कीमत दोनों के स्तर पर प्रतिस्पर्धा करें।
‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ ने बढ़ाया ऐतिहासिक महत्व
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को विशेष स्थान दिया गया। लाल किले की प्राचीर पर तिरंगे के साथ ‘वंदे मातरम्’ की लिखावट और समारोह के दौरान इसका गायन राष्ट्रीय विरासत के इस प्रतीक को केंद्र में लेकर आया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया। इससे इस वर्ष के समारोह को स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृतियों से जोड़ने वाला एक अलग आयाम मिला।
समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम आयोजित हुए। लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन इस पूरे आयोजन का प्रमुख राजनीतिक और राष्ट्रीय संदेश रहा।
आगे की दिशा में आत्मनिर्भरता की होगी अहम भूमिका
प्रधानमंत्री के संबोधन में आत्मनिर्भरता को ऊर्जा, खाद, दवाइयों और औद्योगिक उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जोड़ा गया। वैश्विक स्तर पर बदलती परिस्थितियों के बीच देश की अपनी उत्पादन क्षमता और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत रखना सरकार की प्राथमिकताओं में दिखाई दिया।
इसके साथ भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और व्यापार समझौतों से अवसर हासिल करने का संदेश भी दिया गया। अब आगे यह महत्वपूर्ण होगा कि आत्मनिर्भरता, उत्पादन क्षमता, खाद की उपलब्धता और वैश्विक व्यापार से जुड़ी इन प्राथमिकताओं को जमीन पर किस तरह आगे बढ़ाया जाता है।
कुल मिलाकर, इस वर्ष लाल किले से प्रधानमंत्री का संदेश संकटों के बीच भारत की आंतरिक क्षमता मजबूत करने और देश को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अधिक आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित रहा। किसानों, उद्योगों और रणनीतिक जरूरतों से जुड़े मुद्दों को एक ही व्यापक दृष्टिकोण के साथ सामने रखा गया।
स्वतंत्रता दिवस समारोह और लाल किले से प्रधानमंत्री के संबोधन के अहम संदेश जानने के लिए Live24India से जुड़े रहें।

Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!
