संगीतकार अमित त्रिवेदी ने अपने करियर के उस दौर का खुलासा किया है, जब लगातार सफल गाने देने के बाद उन्हें पहली बार अपने संगीत पर संदेह होने लगा था। कोमल नाहटा के पॉडकास्ट ‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ के नए एपिसोड में उन्होंने बताया कि फिल्म ‘एक मैं और एक तू’ पर काम करते समय बार-बार गाने रिजेक्ट होने से वह काफी परेशान हो गए थे। हालात ऐसे हो गए थे कि वह रो पड़े और खुद से अपनी प्रतिभा को लेकर सवाल करने लगे।
देव डी और उड़ान की सफलता के बाद बदला अनुभव
अमित त्रिवेदी ने बातचीत में बताया कि उनके शुरुआती करियर में उन्हें लगातार सफलता मिल रही थी। फिल्म ‘देव डी’ के लिए उन्होंने 18 गाने तैयार किए थे और सभी चुन लिए गए थे। इसी तरह आमिर के साथ काम करते समय पांच गानों की जरूरत थी और उन्होंने पांच ही गाने बनाए, जिन्हें स्वीकार कर लिया गया।
फिल्म ‘उड़ान’ (2010) के दौरान भी उनका अनुभव ऐसा ही रहा। लगातार गाने स्वीकार होने से उन्हें लगने लगा था कि संगीत उद्योग में काम करने का तरीका शायद ऐसा ही है। उनके मुताबिक, शुरुआती फिल्मों में गानों को लेकर उन्हें उस तरह की असहमति का सामना नहीं करना पड़ा था, जिसका अनुभव बाद में हुआ।
‘एक मैं और एक तू’ में बार-बार रिजेक्ट हुए गाने
अमित त्रिवेदी ने बताया कि करण जौहर के साथ काम करने के दौरान उन्हें एक अलग तरह की चुनौती का सामना करना पड़ा। उन्होंने शकुन बत्रा की फिल्म ‘एक मैं और एक तू’ साइन की थी, जिसे करण जौहर प्रोड्यूस कर रहे थे। इस फिल्म में इमरान खान और करीना कपूर खान मुख्य भूमिकाओं में थे।
संगीतकार के अनुसार, फिल्म के लिए तैयार किए गए उनके गाने बार-बार रिजेक्ट हो रहे थे। उन्होंने बताया कि अगर शकुन बत्रा को कोई गाना पसंद आता था, तो करण जौहर को वह पसंद नहीं आता था। वहीं, करण जौहर को कोई गाना पसंद आने पर शकुन बत्रा उससे सहमत नहीं होते थे।
अमित त्रिवेदी के लिए यह अनुभव इसलिए भी अलग था, क्योंकि इससे पहले वह कई फिल्मों में काम कर चुके थे। फिल्म ‘वेक अप सिड’ (2009) का गाना ‘इकतारा’ भी उनके करियर का हिस्सा था, जिसे उन्होंने अपने शुरुआती अनुभवों में आसानी से तैयार होने वाला गाना बताया। ऐसे में ‘एक मैं और एक तू’ के दौरान लगातार अस्वीकृति ने उन्हें उलझन में डाल दिया।
खुद की प्रतिभा पर होने लगा था संदेह
पॉडकास्ट में अमित त्रिवेदी ने स्वीकार किया कि उस समय वह भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस करने लगे थे। बार-बार गाने रिजेक्ट होने से उन्हें लगने लगा था कि शायद वह पहले की तरह अच्छा संगीत नहीं बना पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह रो भी पड़े थे और खुद से सवाल करने लगे थे कि क्या उनमें अच्छी धुनें बनाने की क्षमता नहीं रही।
हालांकि, उन्होंने अपने पिछले काम को याद करते हुए स्थिति को समझने की कोशिश की। उनकी कई फिल्मों के गाने सफल रहे थे और पहले भी उनके संगीत को स्वीकार किया गया था। इसी वजह से उन्हें एहसास हुआ कि समस्या जरूरी नहीं कि उनकी प्रतिभा में ही हो। इस अनुभव ने उन्हें संगीत निर्माण की प्रक्रिया में अलग-अलग पसंद और रचनात्मक मतभेदों की भूमिका पर सोचने के लिए मजबूर किया।
कोमल नाहटा के पॉडकास्ट में साझा किया अनुभव
‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ के नए सीजन के माध्यम से कोमल नाहटा संगीतकारों, गायकों और संगीत जगत से जुड़े प्रमुख लोगों की रचनात्मक यात्रा और उनसे जुड़े अनसुने अनुभव सामने ला रहे हैं। इस सीरीज में कलाकार अपने करियर के महत्वपूर्ण पड़ावों, प्रेरणाओं और पेशेवर चुनौतियों पर बातचीत करते हैं।
नए एपिसोड में अमित त्रिवेदी ने अपने करियर के ऐसे दौर के बारे में बताया, जिसने उन्हें सफलता के बीच अस्वीकृति का सामना करना सिखाया। उनके अनुभव से यह भी सामने आता है कि किसी कलाकार के लिए लगातार सफल होने के बाद आलोचना या असहमति का सामना करना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इस बातचीत में अमित त्रिवेदी ने अपने अनुभव को व्यक्तिगत नजरिए से साझा किया। उन्होंने बताया कि ‘एक मैं और एक तू’ के दौरान मिले अनुभव ने उन्हें खुद के काम का दोबारा आकलन करने के लिए प्रेरित किया। ‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ का यह एपिसोड संगीतकार के करियर के उस पहलू को सामने लाता है, जो आमतौर पर उनकी सफल फिल्मों और लोकप्रिय गानों के पीछे छिपा रहता है।

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