बेहतरीन थ्रिलर फिल्म ‘बदलापुर’ को रिलीज हुए आज 11 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन नवाजुद्दीन सिद्दीकी की वो जबरदस्त परफॉर्मेंस आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। वक्त के साथ यह फिल्म अपनी बेहतरीन कहानी और उलझे हुए किरदारों की वजह से एक ‘मॉडर्न क्लासिक’ बन चुकी है। फिल्म में नवाज का ‘लायक’ वाला किरदार हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार विलेन्स में से एक माना जाता है, जिसमें उन्होंने खौफ और बेचारगी का एक अनोखा तालमेल दिखाया था।
इस परफॉर्मेंस को जो चीज सबसे खास बनाती है, वो है इसे निभाने का तरीका। डायरेक्टर श्रीराम राघवन ने जानबूझकर कई सीन्स के लिए नवाजुद्दीन को कोई लिखित डायलॉग नहीं दिए थे। इसके बजाय, उन्होंने नवाज को माहौल के हिसाब से नैचुरल तरीके से रिएक्ट करने की छूट दी। नवाजुद्दीन ने ‘लायक’ के किरदार को मौके पर ही अपनी सूझबूझ से गढ़ा, जिससे किरदार के व्यवहार और भावनाओं में एक अलग ही स्वाभाविकता नजर आई। इसी क्रिएटिव आजादी का नतीजा था कि फिल्म के वो सीन्स आज भी अपनी सच्चाई और अनप्रेडिक्टिबिलिटी के लिए याद किए जाते हैं।
इसी बारे में बात करते हुए नवाजुद्दीन ने एक बार बताया था, “इस रोल को निभाना आसान नहीं था क्योंकि वह ऐसा इंसान नहीं था जो खुलकर अपनी भावनाएं जाहिर करे। उसमें बदलाव अंदर ही अंदर हो रहा था, एक ऐसी जगह जहाँ दर्शक उसे देख नहीं सकते थे। और चूंकि वह दिमागी तौर पर उतना विकसित नहीं था, इसलिए वह उन बदलावों को शब्दों में भी बयां नहीं कर सकता था।”
उन्होंने आगे कहा, “जब भी मैं कोई सीन करता था, डायरेक्टर श्रीराम राघवन मुझे याद दिलाते थे कि मेरा किरदार सिर्फ इत्तेफाक से कातिल बना है। हालांकि, यह दिखाना भी बहुत जरूरी था कि कैसे वह अपने ‘बदमाश’ स्वभाव पर टिके रहकर भी अंदर ही अंदर धीरे-धीरे बदल रहा है।”
ग्यारह साल बीत जाने के बाद भी, यह फिल्म नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर का एक सबसे बड़ा मोड़ मानी जाती है। यह साबित करता है कि कैसे बिना किसी दिखावे के, सिर्फ अपने हुनर और सहजता से दी गई परफॉर्मेंस सिनेमा की दुनिया में एक कभी न मिटने वाली पहचान छोड़ सकती है।

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