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सुखबीर गैंगस्टरों को भगाने की बात करने वाले खुद ‘गैंगस्टरों को लाओ कैंपेन’ चला रहे : कुलदीप धालीवाल
- अगर सुखबीर बादल ऐसा मॉडल पेश करना चाहते हैं, तो वे सभी 117 चुनाव क्षेत्रों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की घोषणा क्यों नहीं कर देते
- गुरु घर की जमीने बेचने वालों और घोटालेबाजों को भी टिकटे दे सुखबीर बादल
- कहा- बादल अब राम रहीम से भी उम्मीदवारों की सूचि मंगवा लें
चंडीगढ़, 17 मार्च : आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर तीखा हमला करते हुए कहा कि तरनतारन से कंचनप्रीत कौर को चुनाव क्षेत्र इंचार्ज लगाकर बादल ने इसे स्पष्ट कर दिया है कि वह 2027 में पंजाब के अंदर किस तरह के माडल लाना चाहते हैं। उनहोंने कहा कि जिस तरह भाजपा गुजरात मॉडल की बात करती है या हरियाणा सरकार हरियाणा मॉडल की बात करती है, उसी तरह सुखबीर बादल अब पंजाब में अपना ‘सुखबीर मॉडल’ पेश कर रहे हैं, जिससे सिर्फ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को बढ़ावा मिलेगा।
मंगलवार को पार्टी दफ्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए धालीवाल ने कहा कि अगर सुखबीर सिंह बादल अपने ‘गैंगस्टर्स लाओ’ मुहिम के तहत ऐसा मॉडल पेश करना चाहते हैं, तो उन्हें अभी सभी 117 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर देनी चाहिए, ताकि लोगों को उनकी असली सोच का पता चल सके। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल को अब अबोहर से जगदीश भोले जैसे लोगों को भी टिकट देने की घोषणा कर देनी चाहिए। उन्होंने सुखबीर बादल से सवाल करते हुए पूछा कि वह डेरा बाबा नानक से पहले जैसे लोगों के नामों की घोषणा करने में देरी क्यों कर रहे हैं?
उन्होंने कहा कि अगर अकाली दल पंजाब के जख्मों पर नमक छिड़कना चाहता है, तो सुखबीर बादल बरगाड़ी, बहबल कलां और कोटकपूरा में निहत्थे सिखों पर गोलियां चलाने वाले सुमेध सैनी और उमरानंगल जैसे विवादित अधिकारियों को भी मैदान में उतारने का ऐलान करें। धालीवाल ने कहा कि सुखबीर बादल को अब गुरमीत राम रहीम से भी सूचि मंगवा लेनी चाहिए ताकि उनके ‘गैंगस्टर और क्रिमिनल’ मॉडल की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सके।
धालीवाल ने सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए कहा कि वे उन ‘कमाऊ बेटों’ को टिकट दें, जिन्होंने दरबार साहिब की लंगर की सूखी रोटियों के घोटाले करके बादलों के घर पैसे भेजे हैं। उन्होंने कहा कि सुखबीर जी, उन लोगों को भी टिकट दें जिन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 स्वरूप चुराए और अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट कोहली को भी मैदान में उतारें जो आपके पैसों का हिसाब रखता है। उन पुराने जत्थेदारों को भी टिकट दो जिन्होंने तुम्हारे कहने पर राम रहीम को माफी दी थी, ताकि पंजाब के लोगों को पता चले कि तुम्हारी टोली में किस तरह के लोग शामिल हैं।
आप विधायक पर गुरु घरों की ज़मीन हड़पने का आरोप लगाते हुए कि सुखबीर बादल उन चेलों को भी टिकट दें, जिन्होंने पंजाब में गुरु घरों की ज़मीनें हड़पीं या बेची हैं। उन्होंने कहा कि अंब साहिब और आनंदपुर साहिब की ज़मीनें बेचकर बादलों तक पैसा पहुंचाने वाले मैनेजरों को भी उम्मीदवार बनाया जाए।
धालीवाल ने कहा कि सुखबीर बादल एक तरफ गैंगस्टरों को भगाने की बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ उन्होंने खुद ‘गैंगस्टर लाओ’ मुहिम शुरू की हुई है।
धालीवाल ने आगे कहा कि सुखबीर को एसजीपीसी और गुरु रामदास अस्पताल में लूट-खसोट करने वाले डॉक्टरों और नेताओं को टिकट देकर अपना मन खुश कर लेना चाहिए, क्योंकि पंजाब के लोग अब उन्हें वोट नहीं देंगे।
उन्होंने कहा कि अकाली दल के असली वर्कर पार्टी छोड़कर भाग गए हैं और अब सुखबीर के पास सिर्फ़ पैसे वसूलने वालों की फ़ौज रह गई है। धालीवाल ने तंज करते हुए कहा कि सुखबीर बादल के सत्ता में आने के सपने कभी पूरे नहीं होंगे, लेकिन 117 उम्मीदवारों की घोषणा से उनकी असलियत और उनके ‘जोड़ीदारों’ का चेहरा पूरे पंजाब के सामने नंगा हो जाएगा।
आप सांसद मलविंदर कंग ने लोकसभा में श्री चमकौर साहिब और बलाचौर के लिए रेलवे संपर्क की मांग की
- कंग ने केंद्र से तख्त श्री केसगढ़ साहिब को नांदेड़ और पटना साहिब से जोड़ने वाली सुपरफास्ट ट्रेनें चलाने की अपील की
- रोपड़ में रेलवे ओवरब्रिज के काम में तेजी लाने और चटौली स्टेशन को दोबारा बहाल करने की भी मांग की
- श्री आनंदपुर साहिब रेलवे स्टेशन और मोहाली में सेमीकंडक्टर लैब के लिए 900 करोड़ रुपये के बजट के लिए रेल मंत्री का किया धन्यवाद
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 17 मार्च : आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने लोकसभा में रेलवे के लिए ग्रांट की मांग पर चर्चा के दौरान बोलते हुए, पंजाब में रेलवे संपर्क और आधारभूत संरचना से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए।
कंग ने अमृत भारत स्कीम के तहत श्री आनंदपुर साहिब में विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन विकसित करने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है क्योंकि यह खालसा की जन्मभूमि है। उन्होंने इसके लिए राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने मोहाली में सेमीकंडक्टर लैब के लिए 900 करोड़ रुपये मंज़ूर करने के लिए केंद्र सरकार की भी तारीफ़ की।
लंबे समय से लंबित मांगों का ज़िक्र करते हुए, कंग ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट के तहत आने वाले दो ज़रूरी विधानसभा क्षेत्र, श्री चमकौर साहिब और बलाचौर, अभी भी रेलवे नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि श्री चमकौर साहिब साहिबज़ादों बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह के बेमिसाल बलिदान से जुड़ी एक पवित्र धरती है, जिन्होंने मुगल सेनाओं के खिलाफ़ बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने रेल मंत्री से अपील की कि इस पवित्र शहर को जल्द से जल्द रेलवे से जोड़ा जाए, क्योंकि हर साल दुनिया भर से लाखों भक्त यहां नतमस्तक होने आते हैं।
कंग ने बलाचौर के लिए रेलवे संपर्क की भी मांग करते हुए कहा कि इस इलाके की लंबे समय से अनदेखी की गई है और यह नेशनल रेल नेटवर्क से जुड़ने का हक़दार है।
एक और अहम मुद्दा उठाते हुए, कंग ने सरकार से तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री आनंदपुर साहिब से तख्त श्री हजूर साहिब, नांदेड़ और तख्त पटना साहिब तक रोज़ाना सुपरफास्ट ट्रेन सर्विस शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस इलाके से सीधी हवाई सर्विस बंद हो गई है, जिसकी वजह से श्रद्धालुओं को भरोसेमंद रेल संपर्क मुहैया करवाना जरूरी हो गया है।
सांसद ने मोहाली ज़िले के चटौली रेलवे स्टेशन को फिर से खोलने की मांग की, जो कि जो कोविड-19 महामारी के दौरान बंद कर दिया गया था औऱ वहां ट्रेनों के ठहराव को फिर से बहाल करने की भी बात कही।
इसके अलावा, कंग ने रोपड़ ज़िले में चार रेलवे ओवरब्रिजों के निर्माण की धीमी रफ़्तार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने रेल मंत्री से इन कामों में तेज़ी लाने की मांग की ताकि निर्माण समय पर पूरा हो सके और आने-जाने वालों को राहत मिल सके।
अपनी मांगों को दोहराते हुए, कंग ने अंत में उम्मीद जताई कि केंद्र पंजाब की संपर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े इन ज़रूरी मुद्दों को हल करने के लिए तुरंत कार्रवाई करेगा।
नए अस्पताल से धूरी और 70 गांवों के लोगों को मिलेंगी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं : भगवंत सिंह मान
- धूरी में 21.65 करोड़ रुपये की लागत से बने सब-डिविजनल अस्पताल और माता-शिशु स्वास्थ्य देखभाल केंद्र से संगरूर का स्वास्थ्य ढांचा और मजबूत हुआ
- मुफ्त इलाज और 10 लाख की स्वास्थ्य योजना के साथ ‘आप’ सरकार किसी भी परिवार को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नहीं रहने देगी
धूरी, 17 मार्च : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज धूरी में 50 बिस्तरों की क्षमता वाले सब-डिविजनल अस्पताल और 30 बिस्तरों की क्षमता वाले माता-शिशु स्वास्थ्य ब्लॉक को लोगों को समर्पित किया। यह परियोजना पंजाब की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने और संगरूर जिले में स्वास्थ्य ढांचे को बड़ा बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह परियोजना बुनियादी ढांचे को मजबूत कर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और डॉक्टरों व स्टाफ की उपलब्धता को बेहतर बनाकर सुलभ एवं मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था लागू करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे न केवल धूरी शहर बल्कि आसपास के लगभग 70 गांवों के लोगों को भी लाभ मिलेगा, जिससे हजारों लोगों को घर के नजदीक आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।”
उन्होंने आगे कहा, “21.65 करोड़ रुपये की लागत से बना यह कॉम्प्लेक्स लगभग 73,000 वर्ग फुट में फैला अत्याधुनिक भवन है, जो इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा। इसमें ओपीडी, इनडोर इलाज, इमरजेंसी सेवाएं, जांच सुविधाएं और विशेष सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे सेकेंडरी स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी।”
स्वास्थ्य सेवाओं के दोहरे ढांचे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “50 बिस्तरों वाला सब-डिविजनल अस्पताल व्यापक सेकेंडरी स्वास्थ्य सेवाएं देगा, जबकि 30 बिस्तरों वाला माता-शिशु स्वास्थ्य ब्लॉक गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों की देखभाल को और मजबूत करेगा।”
मुख्यमंत्री ने बताया, “यह अस्पताल वर्ष 1978 में 30 बिस्तरों के साथ स्थापित हुआ था, बाद में इसे 50 बिस्तरों तक अपग्रेड किया गया और अब इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस 80 बिस्तरों वाला अस्पताल बना दिया गया है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए हमारी सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।”
बुनियादी सुविधाओं के बारे में उन्होंने कहा, “अस्पताल में 13 ओपीडी कमरे, इमरजेंसी ब्लॉक, दो रजिस्ट्रेशन काउंटर और बड़ी व छोटी सर्जरी के लिए 7 ऑपरेशन थिएटर हैं। इसके अलावा तीन लैबोरेट्री, ईसीजी, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “अस्पताल में 12 निजी कमरे, 6 जनरल वार्ड, एक पूर्ण रूप से कार्यशील दवा भंडार, एसएमओ कार्यालय, 11 नर्स स्टेशन और 2 लिफ्टें हैं, जो मरीजों की बेहतर देखभाल और कार्यकुशलता को सुनिश्चित करती हैं।”
मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा, “अस्पताल में सर्जिकल सेवाओं के साथ घुटना प्रत्यारोपण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। विशेषज्ञ डॉक्टर, विशेषकर कान-नाक-गला (ईएनटी) के क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करेंगे।”
माता-शिशु स्वास्थ्य पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “यह समर्पित केंद्र अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों की निगरानी में सामान्य और सिजेरियन डिलीवरी की सुविधाएं प्रदान करेगा, जिससे माताओं और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “माताओं और बच्चों के लिए आवश्यक इलाज और जांच मुफ्त उपलब्ध करवाई जाएंगी, ताकि कोई भी परिवार आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित न रहे। अस्पताल के तहत चल रही ईएसआई डिस्पेंसरी के जरिए श्रमिकों को भी स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहेंगी।”
व्यापक स्वास्थ्य सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार ने 1500 से अधिक डॉक्टरों की भर्ती की है, जिनमें 600 से ज्यादा विशेषज्ञ और 900 से अधिक जनरल डॉक्टर शामिल हैं। इसके अलावा आम आदमी क्लीनिकों में 800 से अधिक डॉक्टर तैनात किए गए हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं बेहतर हुई हैं।”
उन्होंने कहा, “हमने सेकेंडरी स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया है और आम आदमी क्लीनिकों के नेटवर्क का विस्तार किया है। 300 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद के जरिए मुफ्त दवाइयों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।”
वित्तीय सुरक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर दिया जा रहा है, ताकि लोगों को बिना आर्थिक बोझ के बेहतर इलाज मिल सके।”
अंत में उन्होंने कहा, “इस परियोजना से धूरी के 58,000 से अधिक निवासियों और आसपास के हजारों लोगों को लाभ होगा। हम पंजाब के हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यदि भगत सिंह भारत के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश का नक्शा कुछ और होता : भगवंत सिंह मान
- आज़ादी के इतने सालों बाद भी हम पुराने सिस्टम के गुलाम हैं, क्या भगत सिंह और करतार सिंह सराभा इसी वजह से शहीद हुए थे?
- चार सालों में सभी वादे पूरे होने से विरोधी बौखलाए, उनके पास चुनाव के समय लोगों के पास जाने के लिए कोई मुद्दा नहीं बचा
- अकाली-भाजपा और कांग्रेस ने बारी-बारी से पंजाब को लूटा, अब इन पार्टियों को लोग कभी मौका नहीं देंगे
धूरी, 17 मार्च : पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि यदि शहीद-ए-आज़म भगत सिंह देश के पहले प्रधानमंत्री होते, तो आज देश का नक्शा बिल्कुल अलग होता। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि आज़ादी के दशकों बाद भी देश पुराने सिस्टम के जाल में क्यों उलझा हुआ है, जबकि इसी सिस्टम से मुक्ति के लिए भगत सिंह और करतार सिंह सराभा जैसे क्रांतिकारियों ने अपनी जान न्योछावर की थी।
उन्होंने कहा कि यह दीवार पर लिखी बात पढ़ लेनी चाहिए कि वर्ष 2027 में भी आम आदमी पार्टी ही सत्ता में आएगी, क्योंकि चार वर्षों में सभी गारंटियां पूरी कर दी गई हैं और विरोधियों के पास जनता के सामने जाने के लिए कोई मुद्दा नहीं बचा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोधी पार्टियां बारी-बारी से पंजाब को लूटने के बाद अब फिर सत्ता में आने के लिए आपस में लड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान शहीद हुए 750 किसानों को पंजाब अभी तक नहीं भूला है।
आज नए बने सब-डिवीजनल अस्पताल को समर्पित करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह दीवार पर लिखी बात पढ़ लेनी चाहिए कि जनहित में लिए गए फैसलों के कारण ‘आप’ राज्य में दोबारा सरकार बनाएगी।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब के लोग 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद ‘आप’ की सरकार बनाने के लिए उत्साहित हैं। वर्ष 2022 में शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के पैतृक गांव से सत्ता संभालने के बाद हमारी सरकार ने कई जनहितकारी फैसले लिए। हमने चार वर्षों में अपने सभी वादे पहले ही पूरे कर लिए हैं और आने वाले एक वर्ष में हम राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।”
शासन व्यवस्था में नई पहल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमने चार साल में सभी वादे पूरे कर राजनीति में एक नई परंपरा शुरू की है, जबकि अन्य पार्टियां पांच साल में भी ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं। पहले दिन से ही हमारी सरकार पिछली सरकारों के खराब सिस्टम को सुधार रही है और हम आम आदमी की भलाई के लिए साहसिक फैसले लेने से नहीं हिचकते।” उन्होंने आगे कहा, “अब कांग्रेस और बादल फिर से राज्य को लूटने का एक और मौका तलाश रहे हैं, जबकि राज्य पहले ही इनके शासनकाल में बहुत कुछ झेल चुका है।”
लोगों की भावनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “राज्य के समझदार लोग इन्हें कभी भी एक और मौका नहीं देंगे और चुनावों के बाद इन्हें राजनीतिक गुमनामी में भेज दिया जाएगा।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “जिन नेताओं ने नशे के कारोबार को संरक्षण दिया था, उन्हें सलाखों के पीछे भेजा गया है। इन नेताओं ने न केवल राज्य में नशे के व्यापार को बढ़ावा दिया, बल्कि अपनी सरकारी गाड़ियों में नशे बेचे और सप्लाई भी किए। पहले किसी ने भी इन प्रभावशाली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं की थी, लेकिन हमारी सरकार ने ऐसा किया और अब वे अपने कर्मों की सजा भुगत रहे हैं।”
इन नेताओं की आपसी मिलीभगत का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन राजनीतिक पार्टियों के बीच एक नापाक गठजोड़ बना हुआ था क्योंकि वे राज्य का खजाना लूटने के लिए एक-दूसरे से हाथ मिला लेते थे। जब ये सत्ता में होते थे तो एक-दूसरे के अपराधों को छुपाने के लिए जानबूझकर आंखें मूंद लेते थे और बचाव कर लेते थे। हालांकि, ‘आप’ सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि इस घिनौने अपराध के दोषियों को जेल भेजा जाए।”
विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “आज भी वे एकजुट हैं। चरणजीत सिंह चन्नी, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा, कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुखबीर सिंह बादल और अन्य नेता मुझे निशाना बनाने वाले समूह में शामिल हैं। पहले ये नेता मुझे एक मनोरंजन करने वाला बताकर मेरा मजाक उड़ाते थे, लेकिन अब डर के मारे दिन-रात मेरा नाम लेते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “2017 में जब ‘आप’ को कई सीटें मिलीं और वह विपक्ष बनी, तब उन्होंने कहा था कि कुछ नहीं होगा। 2022 में भी उन्होंने यही कहा, लेकिन हमारी सरकार ने लोगों के हित में कई पहल कीं। अब फिर वे कहते हैं कि 2027 में कुछ नहीं होगा, लेकिन ‘आप’ भारी बहुमत से दोबारा सरकार बनाएगी।”
विपक्ष की खराब कार्यप्रणाली पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पूरे विपक्षी पक्ष ने विधानसभा के अंदर और बाहर जनता का एक भी मुद्दा नहीं उठाया। इससे स्पष्ट होता है कि वे केवल अपने पदों को लेकर चिंतित हैं क्योंकि वे सिर्फ सत्ता के भूखे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “सत्ता हासिल करने के लिए बेताब अकाली दल लोगों को गुमराह करने के लिए सोशल मीडिया पर मेरे बारे में एआई के माध्यम से बनाए गए वीडियो पोस्ट कर रहा है। यह दर्शाता है कि मेरे खिलाफ किसी भी मुद्दे की कमी के कारण वे हताश हैं और निराश होकर सत्ता के लिए बेताबी में हर कोशिश कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पारंपरिक राजनीतिक पार्टियां मुझसे जलन रखती हैं क्योंकि वे यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं कि एक साधारण परिवार का बेटा राज्य की सत्ता को अच्छे तरीके से चला रहा है। इन पार्टियों ने अपने जन-विरोधी और पंजाब-विरोधी रुख के कारण जनता का विश्वास खो दिया, जिसके चलते उन्हें 2022 में सत्ता से बाहर कर दिया गया।”
उन्होंने कहा कि ये पार्टियां लोगों को गुमराह करने के लिए घटिया हथकंडों का सहारा ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा, “पहले इन नेताओं का स्वागत फूल-मालाओं से किया जाता था, लेकिन अब वे जहां भी जाते हैं, लोग उन्हें हराकर स्वागत करते हैं। लोगों ने आम घरों के बेटों-बेटियों को चुना है, जो अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं, जबकि ये पारंपरिक पार्टियां सत्ता में रहते हुए पूरी तरह असफल रही हैं।”
पिछली सरकार के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन नेताओं ने अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए राज्य के संसाधनों को अंधाधुंध लूटा। जब पंजाब बेरोजगारी, युवाओं के विदेश जाने की प्रवृत्ति और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से जूझ रहा था, तब ये नेता अवैध तरीकों से पैसा कमाने में लगे हुए थे। उन्होंने जनता और राज्य की कीमत पर महल और व्यापारिक साम्राज्य खड़े किए।” उन्होंने आगे कहा, “इन लोगों ने पंजाब की तरक्की और खुशहाली को पटरी से उतार दिया और पंजाब तथा उसकी युवा पीढ़ियों के लिए समस्याएं खड़ी कर दीं। उनके हाथ इस अपराध से रंगे हुए हैं और इतिहास उन्हें पंजाब की पीठ में छुरा घोंपने के लिए कभी माफ नहीं करेगा।”
उन्होंने आगे कहा, “ये नेता बौखला गए हैं क्योंकि हमने जनता के सामने इनके घटिया चरित्र को उजागर कर दिया है और यह उनकी सत्ता के लिए खतरा बन गया है। वे यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे कि अब आम लोगों को पद मिल रहे हैं।” बादलों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “उन्होंने लोगों को झूठे वादों से बहकाकर कारोबार बर्बाद कर दिए। कहा जाता है कि अगर आप पेड़ पर ‘बादल’ लिख देंगे तो वह पेड़ भी सूख जाएगा।”
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को हुआ था और 23 मार्च 1931 को वे मात्र साढ़े 23 वर्ष की आयु में शहीद हो गए थे। उन्होंने देश की आज़ादी और अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने के लिए संघर्ष किया। उनका तरीका अलग था क्योंकि वे युवा और जोशीले थे, जबकि जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी जैसे अन्य नेताओं के अपने तरीके थे। लेकिन बाद में हमने उनकी विरासत को साल में एक बार 23 मार्च को केवल श्रद्धांजलि देने तक सीमित कर दिया।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर भगत सिंह जीवित होते या उन्हें आज़ादी के बाद नेतृत्व का अवसर दिया जाता, तो देश की तस्वीर पूरी तरह अलग होती। उन्होंने बहुत कुछ लिखा था। उनके जेल के पत्र और लेखन एक घोषणापत्र की तरह थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस बात की चिंता नहीं थी कि आज़ादी आएगी या नहीं, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि आज़ादी जरूर आएगी, लेकिन उन्हें इस बात की चिंता थी कि आज़ादी के बाद देश पर शासन कौन करेगा।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “उनकी शहादत के 16 साल बाद देश आज़ाद हुआ। 1952 में जब पहली बार चुनाव हुए, तब भगत सिंह की उम्र लगभग 45 वर्ष होती। उन्हें देश का पहला प्रधानमंत्री होना चाहिए था। अगर भगत सिंह ने भारत का नेतृत्व किया होता, तो देश का पूरा नक्शा और भाग्य अलग होता।”
उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने पहले ही कह दिया था कि आज़ादी के बाद सत्ता गलत हाथों में नहीं जानी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा ही हुआ। 80 साल बाद भी हम उसी पुराने सिस्टम, उसी पटवारी-तहसील ढांचे में फंसे हुए हैं और लोग आज भी नौकरियों और सेवाओं जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जैसे महात्मा गांधी को बापू कहा जाता है, जवाहर लाल नेहरू को चाचा और चौधरी देवीलाल को ताऊ कहा जाता है, उसी तरह मैं खुद को लोगों का बेटा और भाई मानता हूं।” उन्होंने आगे कहा कि पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों ने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है। कांग्रेस ने अपने स्वार्थ के लिए संकीर्ण राजनीति की, जबकि अन्य पार्टियों ने वोट हासिल करने के लिए धर्म का सहारा लिया और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा।
नशों के बारे में उन्होंने कहा, “इन पार्टियों ने युवाओं की नसों में नशा भरकर पंजाब की पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया। पंजाब की युवा पीढ़ी को तबाह करने वाले अब लोगों को गुमराह करने के लिए खोखले दावे कर रहे हैं, लेकिन पंजाबी उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि यह पैसा नहीं, बल्कि हमारे किए गए काम बोल रहे हैं, जिनकी बदौलत हमने लोगों के दिलों में जगह बनाई है।
‘आप’ सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आप सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना’ शुरू की है, जिसके तहत सामान्य वर्ग की 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपए और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपए दिए जाएंगे। यह हमारी माताओं और बहनों के प्रति सच्चे सम्मान का प्रतीक है और उनके चेहरों पर आई मुस्कान ने मुझे बहुत संतोष दिया है।”
रोजगार के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “हम युवाओं के हाथों में टिफिन देना चाहते हैं, ताकि वे नशे से दूर रहकर अपना भविष्य संवार सकें। एक कहावत है कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है, इसलिए हम अधिक से अधिक रोजगार सुनिश्चित कर रहे हैं। अब तक 65,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं।”
बुनियादी ढांचे और कृषि का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सभी क्षेत्रों में बिजली दरें कम कर दी गई हैं। नहर के पानी का उपयोग 21 प्रतिशत से बढ़कर 68 प्रतिशत हो गया है और अगले धान सीजन तक यह 85 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। लगभग 6900 किलोमीटर तक फैले करीब 18,349 नालों को पुनर्जीवित किया गया है और नहर प्रणाली को मजबूत करने के लिए 6500 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
उन्होंने आगे कहा, “पहली बार 1365 गांवों को नहर का पानी मिल रहा है। 16,209 करोड़ रुपए की लागत से 49,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों पर काम चल रहा है।”
शिक्षा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आधुनिक बुनियादी ढांचे, स्मार्ट कक्षाओं और लैब्स के साथ उत्कृष्ट स्कूल स्थापित किए गए हैं। शिक्षकों और प्रिंसिपलों को प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा जा रहा है। पंजाब ने नेशनल अचीवमेंट सर्वे में केरल को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकारी स्कूलों के कई छात्र जेईई, नीट, क्लैट और एनआईएफटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग लेकर सफल हो रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत राज्य के 65 लाख परिवार 10 लाख रुपए तक के कैशलेस इलाज के लिए पात्र हैं। पंजाब सभी नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाला पहला राज्य बन गया है, जहां 881 आम आदमी क्लीनिक रोजाना इलाज प्रदान कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि लगभग 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। किसानों को धान सीजन के दौरान आठ घंटे से अधिक निर्बाध दिन के समय बिजली मिल रही है। बिजली दरें 70 पैसे से घटाकर 1.50 रुपए प्रति यूनिट तक कर दी गई हैं और सरकार ने एक निजी थर्मल प्लांट भी खरीदा है, जिसका नाम श्री गुरु अमरदास जी के नाम पर रखा गया है।
समापन में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मेरा एकमात्र एजेंडा पंजाब की प्रगति और उसके लोगों की खुशहाली है। मैं धूरी के लोगों का ऋणी हूं और इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ूंगा।”
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा, हरपाल सिंह चीमा, डॉ. बलबीर सिंह और बरिंदर गोयल भी उपस्थित थे।
इंडस्ट्री को मिलेंगे नए सितारे! एकता कपूर ने शुरू किया ‘हुनर’, टैलेंट और कहानियों को मिलेगा नया मंच
एकता कपूर के नेतृत्व वाले बालाजी टेलीफिल्म्स ने ‘हुनर’ को लॉन्च करने की घोषणा की है। यह एक नई टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी है, जो कलाकारों को निखारने और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कहानी कहने व परफॉर्म करने के कल्चर को मजबूत करने के लिए समर्पित है।
’हुनर’ का मकसद बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन के मशहूर एक्टर्स और क्रिएटर्स को एक साथ लाना है। यह उन्हें एक ऐसा प्लेटफॉर्म देगा जो न केवल उनके आर्टिस्टिक ग्रोथ में मदद करेगा, बल्कि उन्हें अच्छे मौके दिलाने में भी साथ देगा। टैलेंट को तराशने और यादगार कहानियाँ बनाने की बालाजी की पुरानी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, इस पहल को कलाकारों को सही गाइडेंस, बेहतर रिप्रेजेंटेशन और एक ऐसा माहौल देने के लिए डिज़ाइन किया गया है जहाँ क्रिएटिविटी को बढ़ावा मिल सके।
नए वेंचर के बारे में अपना विजन शेयर करते हुए एकता कपूर ने कहा, “बालाजी में हमारा हमेशा से यह मानना रहा है कि टैलेंट तभी निखरता है जब उसे सही माहौल और प्रोत्साहन मिले। ‘हुनर’ के जरिए हम एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं जहाँ कलाकारों को न सिर्फ रिप्रेजेंट किया जाए, बल्कि उन्हें सही मायनों में समझा भी जाए। हमारा मकसद उन्हें सोच-समझकर गाइडेंस देना, उनकी खूबियों के हिसाब से मौके तलाशने में मदद करना और लंबे समय तक उनके विकास में साथ देना है। यह एक ऐसा सफर बनाने के बारे में है जहाँ टैलेंट को आगे बढ़ने, एक्सपेरिमेंट करने और अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचने का मौका मिले।”
इस शानदार लॉन्च का जश्न मनाने के लिए, प्रतिष्ठित फेयरमोंट मुंबई में एक एक्सक्लूसिव ‘हुनर लॉन्च पार्टी’ आयोजित की जाएगी। इस ग्लैमरस शाम में बॉलीवुड और टेलीविजन के दिग्गज सितारे, इंडस्ट्री लीडर्स, क्रिएटर्स और मीडिया जगत के लोग शामिल होंगे, जो कंपनी की इस भव्य शुरुआत के गवाह बनेंगे।
एकता कपूर हमेशा से नए टैलेंट को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती हैं। इस प्रोड्यूसर ने इंडस्ट्री को आज के दौर के कई मशहूर चेहरे दिए हैं और ‘हुनर’ के साथ वह अपने इसी विजन को और विस्तार दे रही हैं। ‘हुनर’ के जरिए बालाजी टेलीफिल्म्स एंटरटेनमेंट की दुनिया में अपनी पकड़ और मज़बूत कर रहा है, जो कहानी कहने के अपने जुनून के साथ-साथ कलाकारों के बढ़ने, जुड़ने और चमकने के लिए एक खास जगह तैयार कर रहा है।
देवदास से पद्मावत तक : भंसाली की फिल्मोग्राफी इस बात का सबूत है कि वे ट्रैजेडी के मास्टर हैं
कैसे संजय लीला भंसाली भारतीय सिनेमा में ट्रैजेडी के मास्टर बने
भारतीय सिनेमा में बहुत कम फिल्ममेकर ऐसे हैं जिन्होंने दुख और ट्रैजेडी को उतनी खूबसूरती से पर्दे पर दिखाया है जितना संजय लीला भंसाली ने किया है। अपनी भव्य फिल्मों, शानदार सेट, दिल को छू लेने वाले संगीत और गहरी भावनाओं वाली कहानियों के लिए मशहूर भंसाली बार-बार ऐसी फिल्में बनाते हैं जहां प्यार गहरा होता है, किस्मत कठोर होती है और बलिदान लगभग तय होता है। उनकी फिल्में सिर्फ दुख भरी कहानियां नहीं होतीं, बल्कि हर फ्रेम में भावनाएं, कविता और भव्यता दिखाई देती है।
अपनी फिल्मों के जरिए भंसाली ने दिखाया है कि ट्रैजेडी भी खूबसूरत और भावनात्मक रूप से बहुत प्रभावशाली हो सकती है। चाहे अधूरी प्रेम कहानियां हों, समाज से टकराव हो या व्यक्तिगत बलिदान, उनकी कहानियां दर्शकों को ऐसी दुनिया में ले जाती हैं जहां सुंदरता और दर्द साथ-साथ चलते हैं। यही शैली उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे अलग और खास फिल्मकारों में शामिल करती है।
आइए देखते हैं उनकी सात फिल्में, जो दिखाती हैं कि क्यों उन्हें ट्रैजेडी का मास्टर कहा जाता है।
- देवदास
अगर कोई एक फिल्म है जिसने भंसाली को ट्रैजेडी का मास्टर साबित किया, तो वह है देवदास। शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के मशहूर उपन्यास पर आधारित यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो अपने अहंकार, सामाजिक दबाव और भावनाओं से बाहर नहीं निकल पाता।
देवदास और पारो का प्यार अधूरी मुलाकातों, गलत फैसलों और दर्दनाक परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ता है। देवदास का धीरे-धीरे आत्मविनाश की ओर बढ़ना इस कहानी को भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार ट्रैजेडी बना देता है।
- हम दिल दे चुके सनम
पहली नजर में हम दिल दे चुके सनम एक रंगीन प्रेम कहानी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह प्यार, त्याग और भावनात्मक परिपक्वता की कहानी बन जाती है।
नंदिनी का सफर जुनूनी प्यार से जिम्मेदारी और रिश्तों की गहराई को समझने तक का है। फिल्म का अंत नाटकीय दिल टूटने से नहीं, बल्कि एक शांत और गहरी ट्रैजेडी से होता है जहां प्यार को कभी-कभी जिम्मेदारी के लिए छोड़ना पड़ता है।
- ब्लैक
ब्लैक में भंसाली इंसानी संघर्ष और हिम्मत के जरिए ट्रैजेडी को दिखाते हैं। यह फिल्म मिशेल नाम की एक बहरी और अंधी लड़की और उसके शिक्षक की कहानी है, जो उसे भाषा और अभिव्यक्ति सिखाते हैं।
कहानी की भावनात्मक ताकत उसके संघर्ष, कमजोरी और समय के गुजरने की सच्चाई में छिपी है। भंसाली की सधी हुई लेकिन प्रभावशाली कहानी इस फिल्म को उनके करियर की सबसे गहरी और भावनात्मक फिल्मों में शामिल करती है।
- गोलियों की रासलीला राम-लीला
शेक्सपियर की रोमियो और जूलियट से प्रेरित राम-लीला भंसाली की एक रंगीन लेकिन दुखद प्रेम कहानी है।
फिल्म में रंग, संगीत और जश्न भरपूर है, लेकिन इसकी मूल कहानी ट्रैजेडी है। राम और लीला का प्यार दो दुश्मन परिवारों के बीच पनपता है और आखिर में एक दर्दनाक अंत तक पहुंचता है।
- बाजीराव मस्तानी
बाजीराव मस्तानी में भंसाली ने मराठा सेनापति बाजीराव प्रथम और मस्तानी की प्रेम कहानी को भव्य ऐतिहासिक रूप में दिखाया।
उनका रिश्ता समाज, राजनीति और परंपराओं के विरोध का सामना करता है, जिससे यह प्रेम कहानी एक दुखद गाथा बन जाती है। काशीबाई का मौन दर्द और मस्तानी का अटूट प्रेम कहानी को और भी भावनात्मक बना देता है।
- पद्मावत
पद्मावत में भंसाली ट्रैजेडी को एक ऐतिहासिक और विशाल स्तर पर दिखाते हैं। रानी पद्मावती और सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की कहानी आधुनिक भारतीय सिनेमा के सबसे शक्तिशाली क्लाइमेक्स में से एक तक पहुंचती है।
जौहर का दृश्य सम्मान, बलिदान और अत्याचार के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन जाता है।
- गंगूबाई काठियावाड़ी
हालांकि गंगूबाई काठियावाड़ी आखिर में हिम्मत और ताकत की कहानी बन जाती है, लेकिन इसकी शुरुआत गहरी ट्रैजेडी से होती है।
गंगूबाई की जिंदगी धोखे से शुरू होती है, जब उसे मुंबई के रेड-लाइट एरिया में बेच दिया जाता है। बाद में वही गंगूबाई सम्मान और अधिकारों की आवाज बनकर उभरती है। उसका दर्द भरा अतीत ही उसकी ताकत की नींव बनता है।
संजय लीला भंसाली को अक्सर राज कपूर, के. आसिफ और गुरु दत्त जैसे दिग्गज फिल्मकारों के साथ याद किया जाता है। अपनी फिल्मों के जरिए उन्होंने भारतीय कहानियों को भव्य और असली भारतीय अंदाज में दुनिया के सामने पेश किया है। उन्होंने भारतीय सिनेमा को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
आज भंसाली को एक जीवित दिग्गज के रूप में देखा जाता है, जिनका सिनेमा सिर्फ बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं है। उनकी फिल्में इसलिए याद रहती हैं क्योंकि उनमें भव्यता के साथ गहरी मानवीय भावनाएं भी होती हैं।
आने वाले समय में उनकी अगली फिल्म लव एंड वॉर से भी उम्मीद की जा रही है कि यह उनके शानदार करियर का एक और बड़ा और महत्वाकांक्षी अध्याय साबित होगी।
‘अस्सी’ से पहले तापसी पन्नू ने साझा की इंडस्ट्री में पहचान बनाने की मुश्किल कहानी
तापसी पन्नू जब आज अपनी फिल्मों के सफर को पीछे मुड़कर देखती हैं, तो यह रिस्क, हिम्मत और खुद को बार-बार बदलने के एक शानदार सफर जैसा लगता है। ‘पिंक’ और ‘मुल्क’ जैसे समाज को आइना दिखाने वाले ड्रामों से लेकर ‘हसीन दिलरुबा’ जैसे थ्रिलर और ‘सांड की आंख’ जैसे स्पोर्ट्स बायोग्राफिकल ड्रामा तक, इस एक्ट्रेस ने लगातार ऐसी कहानियों का साथ देकर अपनी एक अलग पहचान बनाई है जो पुरानी सोच को चुनौती देती हैं। अब उनकी नई फिल्म ‘अस्सी’ के आने के साथ ही, एक बार फिर उस खास पहचान की चर्चा हो रही है जो उन्होंने इंडस्ट्री में अपने दम पर बनाई है।
बहुत से दर्शकों के लिए, तापसी पन्नू की फिल्म का मतलब ही होता है—गहरे किरदार, सोचने पर मजबूर कर देने वाली कहानी और दमदार परफॉरमेंस। अपनी फिल्मों के ज़रिए अपने नाम की एक खास पहचान बनाने की चुनौती पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “बहुत ज्यादा।” पीछे मुड़कर देखते हुए तापसी कहती हैं कि उनकी पसंद के पीछे कोई बहुत सोच-समझकर बनाया गया प्लान नहीं था। जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब उनके पास ऑप्शन भी कम थे। उन्होंने बताया, “शुरुआत में आपके पास कम विकल्प होते हैं, और आप वही चुनते हैं जो आपको सबसे सही लगता है। फिर कुछ ऐसा क्लिक हुआ, जिससे और रास्ते खुलते गए। और फिर धीरे-धीरे आपको अपनी मंज़िल मिल गई। इतनी सारी फिल्में करने के बाद मुझे समझ आया कि मुझे ऐसी फिल्में बनाने में मज़ा आ रहा है और दर्शक भी इन्हें देखना पसंद कर रहे हैं। वैचारिक तौर पर भी, इन फिल्मों या किरदारों को करते वक्त मेरे अंदर कोई उलझन नहीं होती। मैंने कभी इसे अपने करियर के तौर पर नहीं सोचा था। इसलिए मेरे लिए ऐसा कुछ नहीं था कि मैं फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह से आगे बढ़ूँगी कि पहले ऐसी फिल्में करूँगी, फिर वैसी। मैंने कभी ऐसा कोई रास्ता नहीं बनाया था।”
तापसी कहती हैं कि उन्होंने काम की बारीकियां और इंडस्ट्री को साथ-साथ सीखा है, और कदम-दर-कदम आगे बढ़ी हैं। आज भी, वो अपने करियर को उसी भूख के साथ देखती हैं जो उनमें शुरुआत के समय थी। उन्होंने बताया, “मैंने काम करते-करते ही अपना काम सीखा। इसलिए यह एक बहुत कठिन लड़ाई रही है। मैंने अच्छे, बुरे और बहुत बुरे दिन देखे हैं। ज़ाहिर है, हर किसी की तरह। मुझे नहीं लगता कि इस इंडस्ट्री में किसी के लिए भी राह बहुत आसान होती है। हर किसी की अपनी लड़ाइयां, जीत और हार होती है। मुझे यहाँ तक पहुँचने में लंबा समय लगा। लेकिन अगर मैं इसे देखूं, तो मुझे अभी भी ऐसा महसूस नहीं होता कि अब कुछ बड़ा हो गया है और मैं आराम कर सकती हूँ, या मैं यहाँ टिक गई हूँ। मुझे अभी तक वो ‘मुकाम हासिल कर लेने’ वाली फीलिंग उतनी नहीं आती। मुझे अब भी लगता है कि मुझे अभी बहुत कुछ करना है।”
‘अस्सी’ के रिलीज होने के साथ ही, इसने उस भरोसे को और मजबूत कर दिया है जो दर्शक और क्रिटिक्स पिछले कई सालों से तापसी पन्नू से जोड़कर देखते आए हैं, एक ऐसी कलाकार जो किसी भी कहानी को पूरी शिद्दत के साथ संभाल सकती है। इस फिल्म में, तापसी ने एक बार फिर दमदार परफॉरमेंस दी है, जहाँ उन्होंने कहानी को इमोशनल गहराई और एक शांत मजबूती के साथ आगे बढ़ाया है। ‘अस्सी’ के साथ तापसी ने न केवल एक और पेचीदा किरदार को बखूबी निभाया है, बल्कि खुद को एक असली ‘प्रोटागोनिस्ट’ (मुख्य कलाकार) के रूप में भी साबित किया है, जिस पर दर्शक उन कहानियों के लिए भरोसा करते हैं जो समाज में मायने रखती हैं।
‘धुरंधर द रिवेंज’ में रणवीर सिंह से टकराते नजर आएंगे अर्जुन रामपाल
साल का सबसे बड़ा फेस-ऑफ रणवीर सिंह और अर्जुन रामपाल के बीच फिल्म धुरंधर द रिवेंज में देखने को मिलने वाला है। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के दूसरे भाग की रिलीज से पहले मेकर्स ने दमदार ‘आरी आरी’ ट्रैक जारी किया है, जो रामपाल के आईएसआई मेजर इकबाल और सिंह के हमज़ा अली माज़री के बीच होने वाली जबरदस्त टक्कर की एक झलक पेश करता है – वह अंतिम मुकाबला जिसका इंतजार दर्शक तब से कर रहे हैं जब से धुरंधर का तूफान शुरू हुआ था।
इस बार दांव बहुत बड़े हैं। गुस्सा असली है और कहानी की तीव्रता अपने चरम पर पहुंच चुकी है। अर्जुन रामपाल एक ऐसे अभिनेता हैं जो अपने किरदार के पीछे पूरी तरह खो जाते हैं, उसे जीते हैं और अपने अभिनय से उसे एक अलग पहचान देते हैं। इस बार भी उन्होंने अपनी सीमाओं को पार करते हुए क्रूर हैंड-टू-हैंड एक्शन सीक्वेंस किए हैं, जो उनके किरदार के ठंडे हावभाव, खामोशियों और डरावने संवादों से आगे जाकर आतंक को और बढ़ाते हैं। अगर धुरंधर में आईएसआई मेजर इकबाल की झलक देखने को मिली थी, तो सीक्वल में उसका असली रूप सामने आएगा।
एक तरफ ‘आरी आरी’ गाने में रामपाल अपने विलेन अवतार में नजर आते हैं, जहां उनके क्लोजअप्स रोंगटे खड़े कर देते हैं — चेहरे पर चोट के निशान, हाथ में सिगार और सोने के दांत के साथ उनकी खौफनाक मुस्कान सिहरन पैदा कर देती है। वहीं दूसरी ओर, रामपाल जबरदस्त एक्शन सीक्वेंस करते हुए अपने किरदार को और भी परतदार बनाते हैं। इससे पहले दर्शक उन्हें रा.वन, ओम शांति ओम, क्रैक, राणा नायडू सीजन 2 जैसी परियोजनाओं में एक्शन करते देख चुके हैं — लेकिन इस बार रामपाल पहले से कहीं ज्यादा खूंखार, खतरनाक और धारदार नजर आने वाले हैं।
और अर्जुन रामपाल के आईएसआई मेजर इकबाल के साथ क्या होने वाला है… उसके लिए आप अभी भी तैयार नहीं हैं!
जियो स्टूडियोज प्रस्तुत, बी62 स्टूडियोज प्रोडक्शन और आदित्य धर की फिल्म धुरंधर द रिवेंज एक हाई-ऑक्टेन स्पाई-एक्शन थ्रिलर है। इसे आदित्य धर ने लिखा, निर्देशित और प्रोड्यूस किया है, जबकि ज्योति देशपांडे और लोकेश धर इसके निर्माता हैं। यह फिल्म 19 मार्च 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ — इन पांच भाषाओं में रिलीज होगी।
अनजान लोगों की कहानी 19 मार्च 2026 को गुड़ी पड़वा और उगादी के मौके पर, और ईद से पहले, दुनिया भर के सिनेमाघरों में सामने आएगी।
Dhurandhar The Revenge की रिलीज़ से पहले 13 मार्च को Cinema Hall में फिर रिलीज़ हो रही धुरंधर
धुरंधर का दीवानापन अभी तक खत्म नहीं हुआ है। 19 मार्च को आने वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म धुरंधर द रिवेंज से पहले, जियो स्टूडियोज और बी62 स्टूडियोज अपनी ग्लोबल ब्लॉकबस्टर फिल्म धुरंधर को एक खास री-रिलीज़ के साथ फिर से बड़े पर्दे पर ला रहे हैं। यह फिल्म दुनिया भर में करीब 500 स्क्रीन पर दोबारा रिलीज़ होगी, जिसमें भारत में लगभग 250 स्क्रीन पर 12 मार्च (आज) से और विदेशों में करीब 250 स्क्रीन पर 13 मार्च से दिखाई जाएगी।
फ्रेंचाइज़ी के फैंस के लिए यह एक शानदार मौका है कि वे उस फिल्म को फिर से सिनेमाघरों में देख सकें जिसने स्पाई-एक्शन जॉनर को नई पहचान दी थी। इसके बाद कुछ ही दिनों में वे इसका सीक्वल धुरंधर द रिवेंज भी बड़े पर्दे पर देख सकेंगे और कहानी के दोनों हिस्सों का अनुभव लगातार कर पाएंगे।
भारत में कुछ बड़ी फिल्मों की दोबारा रिलीज़ पहले भी देखी गई है, लेकिन हिंदी फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोबारा रिलीज़ होना बहुत ही कम होता है। ऐसे में धुरंधर की यह री-रिलीज़ फ्रेंचाइज़ी के लिए एक अहम पल है और यह दिखाती है कि दुनिया भर में इस फिल्म की कितनी ज़बरदस्त मांग है। सिर्फ उत्तर अमेरिका में ही यह फिल्म करीब 185 स्क्रीन पर फिर से सिनेमाघरों में लौट रही है, जो इसके अगले भाग को लेकर दर्शकों की उत्सुकता को दिखाता है।
उत्साह को और बढ़ाते हुए, धुरंधर द रिवेंज के खास प्रीमियर शो 18 मार्च को अमेरिका और कनाडा में बुधवार के दिन आयोजित किए जाएंगे, यानी इसकी वैश्विक रिलीज़ से एक दिन पहले। ये प्रीमियर ज्यादातर प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट (पीएलएफ) स्क्रीन पर होंगे। इन स्क्रीन पर बड़ी दीवार जैसी स्क्रीन, डॉल्बी एटमॉस जैसे दमदार साउंड सिस्टम, बेहतर प्रोजेक्शन और लग्ज़री सीटिंग की सुविधा होती है। आम तौर पर ऐसे फॉर्मेट बड़े हॉलीवुड इवेंट फिल्मों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इन मिड-वीक प्रीमियर शो के कई टिकट पहले ही हाउसफुल हो चुके हैं, जिससे साफ है कि फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है।
हाल ही में रिलीज़ हुआ धुरंधर द रिवेंज का ट्रेलर दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और ट्रेड एक्सपर्ट्स व एग्ज़िबिटर्स भी इसकी अंतरराष्ट्रीय रिलीज़ को लेकर काफी उम्मीदें जता रहे हैं। पहले भाग की री-रिलीज़ और उसके कुछ ही दिनों बाद आने वाले सीक्वल के साथ, दुनिया भर के दर्शकों को एक बार फिर उस रोमांच, भव्यता और रहस्य का अनुभव करने का मौका मिलेगा जिसने धुरंधर को एक सिनेमाई घटना बना दिया था।
जियो स्टूडियोज प्रस्तुत करता है बी62 स्टूडियोज का प्रोडक्शन और आदित्य धर की फिल्म धुरंधर द रिवेंज। यह हाई-ऑक्टेन स्पाई-एक्शन थ्रिलर आदित्य धर द्वारा लिखी, निर्देशित और निर्मित की गई है, जबकि ज्योति देशपांडे और लोकेश धर इसके निर्माता हैं। यह फिल्म 19 मार्च 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ इन पांच भाषाओं में रिलीज़ होगी।
अंडरकवर एजेंट की कहानी 19 मार्च 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में गुड़ी पड़वा और उगादी के मौके पर, और ईद से पहले, दर्शकों के सामने आएगी।
