नई दिल्ली : देश की शीर्ष अदालत ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा बार-बार सप्लीमेंट्री चार्जशीट करने को गलत बताते हुए कहा कि जांच एजेंसी इसलिए ऐसा कर रही है, ताकि मामले में ट्रायल शुरू न हो पाए और आरोपी को जमानत न मिल सके। कोर्ट ने ED से कहा कि इस तरह की प्रैक्टिस गलत है।
ऐसा करके किसी आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए जेल में नहीं रख सकते। सुप्रीम कोर्ट ने ED की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा, “डिफॉल्ट जमानत का पूरा उद्देश्य ही यह है कि आप (आरोपी को) तब तक गिरफ्तार न करो जब तक जांच पूरी न हो। आप (एक आरोपी को गिरफ्तार कर) यह नहीं कह सकते कि जांच पूरी होने तक मुकदमा शुरू नहीं होगा। ऐसा नहीं हो सकता कि आप पूरक चार्जशीट दाखिल करते रहें और व्यक्ति (आरोपी) बिना मुकदमे के जेल में रहे।” कोर्ट ने साथ ही कहा कि इस मामले में शख्स 18 महीने से जेल में है।
इससे हमें परेशानी हो रही है। किसी मामले में हम इस मुद्दे को उठाएंगे। जब आप किसी आरोपी को गिरफ्तार करते हैं तो मुकदमा शुरू करना जरूरी होता है। अदालत ने दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की कैद का जिक्र किया, जिन्हें फरवरी 2023 में शराब नीति मामले में ED ने गिरफ्तार किया था।

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