लंबी : शिरोमणि अकाली दल के प्रेसिडेंट सुखबीर सिंह बादल ने गिद्दड़बाहा से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। अकाली दल के चीफ सुखबीर बादल ने ऐलान किया कि वह 2027 का चुनाव गिद्दड़बाहा से लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि गिद्दड़बाहा के लोगों ने यह मांग की है। सुखबीर बादल अब तक जलालाबाद से चुनाव लड़ते रहे हैं। उन्होंने 2009 का उपचुनाव जलालाबाद से जीता था। इसके बाद, उन्होंने 2012 और 2017 में भी इसी सीट से जीत हासिल की। गौरतलब है कि इस सीट से हटाए गए प्रकाश सिंह बादल लगातार चुनाव लड़ते आ रहे हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले सुखबीर सिंह बादल लंबे समय से जलालाबाद सीट से चुनाव लड़ते आ रहे हैं। बादल परिवार का गिद्दड़बाहा सीट से पुराना नाता है, क्योंकि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और सुखबीर सिंह बादल के पिता प्रकाश सिंह बादल भी इसी सीट से MLA रह चुके हैं।
Badal
पंजाब यूनिवर्सिटी मुद्दे पर अकाली दल का पर्दाफाश, सत्ता में रहते हुए पीयू को केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने की लिखित मंजूरी दी : बलतेज पन्नू
चंडीगढ़ : आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल (बादल) पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। ‘आप’ पंजाब के वरिष्ठ नेता और महासचिव बलतेज पन्नू ने कहा कि अकाली दल अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
बलतेज पन्नू ने सुखबीर बादल के हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि पिछले दिनों सुखबीर बादल ने यूनिवर्सिटी जाकर दावा किया था कि अकाली दल इस संस्थान को बचाने की लड़ाई लड़ेगा। उनके इस दावे को हास्यास्पद बताते हुए पन्नू ने एक पुरानी सरकारी चिट्ठी का हवाला दिया और बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अकाली दल की सरकार के समय ही लिखित रूप में ‘नो ऑब्जेक्शन’ (अनापत्ति) दिया गया था कि अगर पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्रीय यूनिवर्सिटी में बदला जाता है, तो पंजाब सरकार को कोई एतराज नहीं होगा। पन्नू ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग कल तक यूनिवर्सिटी को केंद्र के हवाले करने की तैयारी कर रहे थे, आज वही इसे बचाने का नाटक कर रहे हैं।
‘आप’ नेता ने कहा कि अकाली दल द्वारा पंजाब को धोखा देने की सूची बहुत लंबी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसवाईएल नहर के मामले में भी अकाली दल ने पैसे लेकर नहर निकालने की मंजूरी दी थी। इसी तरह, जब केंद्र सरकार तीन काले कृषि कानून लेकर आई थी, तब भी अकाली दल ने भाजपा का समर्थन किया था। उस समय इन्होंने कहा था कि इन कानूनों में कुछ भी गलत नहीं है और वे इसे लागू करवाएंगे, लेकिन जब पंजाब के किसानों ने इसका कड़ा विरोध किया, तो मजबूरी में इन्होंने इस्तीफे का ड्रामा रचा।
बलतेज पन्नू ने स्पष्ट किया कि अब वह दौर बीत चुका है जब सियासी नेता अलग-अलग जगहों पर जाकर अलग-अलग बयान देकर बच निकलते थे। आज पंजाब के लोग जागरूक हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बादल परिवार ने सत्ता में रहते हुए सूबे के हकों को कमजोर किया है। पिछली सरकारों, और विशेष रूप से अकाली दल ने अपने निजी और राजनीतिक फायदों के लिए पंजाब के हितों का सौदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पन्नू ने कहा कि आज पंजाब के लोग जिस संकट का सामना कर रहे हैं, वह इन्हीं पारंपरिक पार्टियों के स्वार्थ का नतीजा है। चाहे वह पंजाब के पानी का मुद्दा हो, एसवाईएल नहर का विवाद हो, या अब पंजाब यूनिवर्सिटी का मसला, अकाली दल और पिछली सरकारों ने हर मौके पर पंजाब के हितों से समझौता किया है।
अंत में पन्नू ने साफ किया कि आम आदमी पार्टी पंजाब यूनिवर्सिटी के संघीय ढांचे को बचाने और पंजाब के हकों के लिए मजबूती से खड़ी रहेगी और अकाली दल के झूठ को जनता के सामने बेनकाब करती रहेगी।
