वॉशिंगटन/तेहरान, 8 जुलाई : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव में बदलता नजर आ रहा है। अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान के साथ लागू युद्धविराम (सीजफायर) अब समाप्त हो चुका है। ट्रंप के इस बयान के कुछ ही समय बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई हाल के दिनों में ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, तटीय रडार स्टेशन, एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों के साथ-साथ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े 60 से अधिक नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की समुद्री मार्गों को बाधित करने की क्षमता को कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम से जुड़ी शर्तों का पालन नहीं किया, इसलिए अमेरिका अब खुद को उस समझौते से बंधा हुआ नहीं मानता। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि हालात सामान्य होते हैं और ईरान सकारात्मक रुख अपनाता है तो भविष्य में बातचीत की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को शांति समझौते का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य नेतृत्व का कहना है कि देश अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने एकतरफा सैन्य कार्रवाई कर क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन घटनाओं के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। कई देशों ने अपने सैन्य अड्डों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और समुद्री मार्गों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिला। तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि शेयर बाजारों में भी निवेशकों की चिंता बढ़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में शामिल है। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाजी जारी है। हालांकि अमेरिका ने भविष्य में बातचीत की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या तनाव और बढ़ेगा या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया जा सकेगा।
Q1. अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों किया?
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और हाल में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई।
Q2. डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर को लेकर क्या कहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया, इसलिए दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम (सीजफायर) अब समाप्त हो चुका है।
Q3. अमेरिकी हमलों में किन ठिकानों को निशाना बनाया गया?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार वायु रक्षा प्रणालियां, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, तटीय रडार स्टेशन, एंटी-शिप मिसाइल ठिकाने और IRGC से जुड़े कई नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाया गया।
Q4. ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ईरान ने अमेरिकी हमलों को शांति समझौते का उल्लंघन बताया और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। रिपोर्टों के अनुसार उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन भी दागे।
Q5. इस तनाव का वैश्विक असर क्या हो सकता है?
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता और मध्य-पूर्व में सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
