चंडीगढ़, 8 सितंबर : पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को पंजाब सिविल सचिवालय में कर्मचारियों ने धरना देकर 18 फीसदी लंबित महंगाई भत्ते (DA), पुरानी पेंशन योजना (OPS) और अन्य मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। कर्मचारियों और पेंशनरों की ओर से लंबे समय से लंबित वित्तीय और सेवा संबंधी मामलों को जल्द हल करने की मांग की जा रही है।
कर्मचारी संगठनों के आंदोलन में लंबित DA और OPS सबसे प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। इसके अलावा वेतन आयोग के बकाये, ACP और अन्य सेवा संबंधी मांगें भी उठाई जा रही हैं। सचिवालय में हुए आज के धरने ने सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जारी गतिरोध को एक बार फिर सामने ला दिया है।
जिस सचिवालय में फूलों से हुआ था स्वागत, वहीं धरना
कर्मचारियों के इस प्रदर्शन का राजनीतिक संदर्भ भी खास है। पंजाब सिविल सचिवालय में मुख्यमंत्री बनने के बाद भगवंत मान का कर्मचारियों ने फूलों की वर्षा कर स्वागत किया था। अब इसी सचिवालय में कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ धरना दे रहे हैं।
शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने इसी घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर हमला बोला। मजीठिया ने DA, बकाया राशि और पेंशन से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने सरकारी विज्ञापनों पर खर्च को लेकर भी सवाल उठाए।
हालांकि मजीठिया द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक बयान हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
18 फीसदी लंबित DA की मांग पर जोर
कर्मचारी संगठनों के अनुसार 18 फीसदी लंबित DA उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। अगस्त 2026 में हुए प्रदर्शनों के दौरान भी कर्मचारियों ने लंबित DA की किस्तें जारी करने की मांग उठाई थी।
पिछले महीने चंडीगढ़ के सेक्टर-39 में हजारों कर्मचारी और पेंशनर एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। इस दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की।
अब 8 सितंबर को पंजाब सिविल सचिवालय में हुए धरने से कर्मचारियों ने एक बार फिर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया है।
2023 की हड़ताल के बाद भी जारी है DA का मुद्दा
कर्मचारी संगठनों का मौजूदा आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विसेज यूनियन ने 8 नवंबर 2023 को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी। DA की लंबित किस्तें जारी करने और OPS लागू करने सहित कई मांगों को लेकर शुरू हुई यह हड़ताल करीब 40 दिन चली थी।
18 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक के बाद हड़ताल खत्म हुई थी। इसके बाद जुलाई 2022 से संबंधित 4 फीसदी DA की एक किस्त जारी की गई। हालांकि कर्मचारी संगठनों के मुताबिक इसके बाद की DA किस्तें लंबित रहीं।
यही कारण है कि DA का मुद्दा कर्मचारी संगठनों के आंदोलन में लगातार बना हुआ है। अब 18 फीसदी लंबित DA को लेकर कर्मचारी फिर सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
OPS लागू करने के बावजूद कर्मचारियों में असंतोष
पुरानी पेंशन योजना भी कर्मचारियों की प्रमुख मांग है। पंजाब सरकार ने 18 नवंबर 2022 को OPS लागू करने का नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके बावजूद कर्मचारी संगठनों के अनुसार योजना के व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर अगस्त-सितंबर 2026 तक असंतोष बना हुआ है।
OPS और DA को लेकर अलग-अलग कर्मचारी संगठन पहले भी प्रदर्शन कर चुके हैं। 5 सितंबर 2024 को सरकारी स्कूल शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, लंबित DA किस्तें जारी करने और 37 भत्तों समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। लुधियाना में शिक्षकों ने मिनी सचिवालय के बाहर सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की थी।
महाहड़ताल से लेकर आज के धरने तक आंदोलन तेज
27 अगस्त 2026 को कर्मचारी संगठनों ने महाहड़ताल का आह्वान किया था। संगठनों के मुताबिक तीन लाख से अधिक कर्मचारियों ने सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर विरोध जताया। वहीं, चार लाख से अधिक पेंशनरों के धरनों में शामिल होने की बात भी संगठनों की ओर से कही गई।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार को 7 सितंबर तक अपनी मांगों पर कार्रवाई करने का समय दिया था। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 8 सितंबर को फिर सामूहिक अवकाश और प्रदर्शन का ऐलान किया गया था। इसी क्रम में आज पंजाब सिविल सचिवालय में धरना दिया गया।
आगे भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए भी कार्यक्रम घोषित किए हैं। मंत्रियों और आम आदमी पार्टी के विधायकों के आवासों के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है। इसके अलावा 10 अक्टूबर को संगरूर में महा रैली का ऐलान भी किया गया है।
इस बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों का भी कर्मचारी पक्ष की ओर से उल्लेख किया जा रहा है। मार्च 2026 में अदालत ने संशोधित पेंशन, लंबित DA के बकाये और संबंधित देय राशि के भुगतान को लेकर सरकार को निर्देश दिए थे। बाद में 3 अगस्त 2026 के आदेश में भी अदालत के पहले निर्देशों का उल्लेख किया गया, जिसमें लंबित DA/DR किस्तों और पेंशन संबंधी बकाये के भुगतान की बात थी।
फिलहाल पंजाब सिविल सचिवालय में हुआ आज का धरना कर्मचारी आंदोलन के बढ़ते दबाव का संकेत है। कर्मचारी संगठन लंबित DA, OPS और अन्य सेवा संबंधी मांगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, आंदोलन को लेकर सरकार की अगली कार्रवाई पर अब कर्मचारी संगठनों की नजर है। आने वाले दिनों में प्रस्तावित प्रदर्शन और 10 अक्टूबर की संगरूर महा रैली से इस आंदोलन की अगली तस्वीर सामने आएगी।
