मनोरंजन डेस्क, 25 अगस्त : कृति सेनन एक बार फिर सोशल मीडिया पर शुरू हुई ऐसी बहस के केंद्र में हैं, जिसका संबंध उनके अभिनय या किसी फिल्मी परियोजना से नहीं, बल्कि उनके पहनावे से है। रक्षाबंधन के एक विज्ञापन में नजर आईं कृति के परिधान को लेकर सोशल मीडिया के एक वर्ग ने सवाल उठाए। इसके बाद कई नेटिजन्स उनके समर्थन में सामने आए और महिलाओं के कपड़ों को लेकर होने वाली नैतिकता की बहस पर सवाल खड़े किए।
रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार के लिए तैयार किए गए विज्ञापन में कृति सेनन आइवरी रंग के लहंगे में दिखाई दीं। उनके परिधान में डीप-नेक ब्लाउज़ और केप शामिल था। कृति का यह रूप फैशन और उत्सवी अंदाज का मेल नजर आया, लेकिन सोशल मीडिया के कुछ यूजर्स को उनका पहनावा त्योहार के अनुरूप नहीं लगा।
विवाद बढ़ने के बाद चर्चा केवल कृति के कपड़ों तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया पर महिलाओं की पसंद, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और त्योहारों के दौरान पहनावे को लेकर समाज की अपेक्षाओं पर भी बहस शुरू हो गई।
कृति के पहनावे को लेकर क्यों हुई बहस?
रक्षाबंधन के विज्ञापन में कृति के लहंगे और ब्लाउज़ को लेकर कुछ यूजर्स ने आपत्ति जताई। कुछ टिप्पणियों में उनके ब्लाउज़ की तुलना ऐसे परिधान से की गई, जिसे उन्होंने त्योहार के लिए अनुपयुक्त माना। कुछ लोगों ने विज्ञापन में इस तरह की पोशाक दिखाए जाने पर भी सवाल उठाए और इसे कथित तौर पर एक विशेष विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की।
हालांकि, इन टिप्पणियों के जवाब में कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग रुख अपनाया। उनका कहना था कि किसी महिला के कपड़ों को उसकी नैतिकता, संस्कृति या चरित्र से जोड़ना उचित नहीं है। उनके अनुसार, किसी त्योहार के विज्ञापन में नजर आने वाली अभिनेत्री के पहनावे को लेकर समाज की ओर से कोई तय नियम नहीं होना चाहिए।
नेटिजन्स ने कृति के समर्थन में क्या कहा?
कृति के समर्थन में सामने आए सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि आखिर महिलाओं के कपड़े सार्वजनिक बहस का विषय क्यों बन जाते हैं। एक यूजर ने तर्क दिया कि समाज महिलाओं से एक साथ कई विरोधाभासी अपेक्षाएं रखता है। उनके अनुसार, महिला को आधुनिक भी दिखना है, लेकिन उतना ही जितना दर्शक स्वीकार करें; पारंपरिक भी रहना है, लेकिन अपनी पसंद के अनुसार नहीं।
एक अन्य यूजर ने कहा कि महिलाओं के कपड़ों पर निगरानी को हर बार परंपरा का नाम देना उचित नहीं है। उनका कहना था कि कोई महिला रक्षाबंधन मना सकती है और अपनी पसंद के कपड़े भी पहन सकती है। दोनों चीजें एक साथ संभव हैं।
एक अन्य टिप्पणी में सवाल किया गया कि कृति के कपड़े आखिर नैतिक मुद्दा क्यों बन गए। यूजर ने याद दिलाया कि यह केवल एक विज्ञापन था और अभिनेत्री का पहनावा व्यक्तिगत पसंद का विषय है।
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महिलाओं की पसंद और स्वतंत्रता पर छिड़ी बहस
कृति सेनन से जुड़ा यह विवाद अब केवल एक विज्ञापन तक सीमित नहीं दिख रहा। सोशल मीडिया पर हुई प्रतिक्रियाओं ने महिलाओं के पहनावे को लेकर लंबे समय से चली आ रही सामाजिक अपेक्षाओं पर चर्चा को फिर सामने ला दिया है।
आलोचना करने वालों की सोच में त्योहार और पहनावे के बीच एक खास तरह का संबंध दिखाई देता है। वहीं, कृति के समर्थकों का तर्क है कि परंपरा और व्यक्तिगत पसंद एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उनके मुताबिक किसी महिला का पारंपरिक या आधुनिक परिधान चुनना उसकी अपनी स्वतंत्रता का हिस्सा है।
यही वजह है कि कई यूजर्स ने इसे केवल फैशन से जुड़ा विवाद मानने से इनकार किया। उनके लिए असली सवाल यह है कि क्या महिलाओं को अपने कपड़ों और व्यक्तित्व के बारे में खुद फैसला लेने की पर्याप्त स्वतंत्रता दी जाती है।
कपड़ों पर ‘पितृसत्तात्मक पहरेदारी’ का सवाल
सोशल मीडिया पर सामने आई प्रतिक्रियाओं में महिलाओं के कपड़ों पर होने वाली लगातार निगरानी को लेकर भी सवाल उठे। कुछ यूजर्स ने इसे ऐसी सामाजिक सोच से जोड़ा, जिसमें महिलाओं के पहनावे को तय मानकों के आधार पर परखा जाता है।
किसी महिला के पारंपरिक कपड़े पहनने पर भी उसके पहनावे की लंबाई, डिजाइन या शैली पर सवाल उठ सकते हैं और आधुनिक परिधान चुनने पर भी उसे अलग तरह की आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। कृति के मामले में भी बहस इसी विरोधाभास की ओर इशारा करती दिखाई दी।
समर्थन में आए यूजर्स का कहना है कि महिलाओं को आत्मविश्वासी, ग्लैमरस या पारंपरिक दिखने के लिए दर्शकों की स्वीकृति की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उनकी पसंद को सिर्फ इसलिए नैतिक या सांस्कृतिक बहस में नहीं बदला जाना चाहिए क्योंकि वह किसी सार्वजनिक विज्ञापन का हिस्सा है।
रक्षाबंधन के विज्ञापन से आगे क्या संदेश?
कृति सेनन से जुड़ा यह विवाद एक फैशन चुनाव से शुरू हुआ, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा महिलाओं की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद तक पहुंच गई। एक ओर कुछ लोग त्योहारों के दौरान पारंपरिक मर्यादाओं को महत्व देते हैं, वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स का मानना है कि आधुनिक समाज में व्यक्तिगत पसंद को भी उतना ही सम्मान मिलना चाहिए।
फिलहाल इस बहस में कोई एक राय सामने नहीं आई है। लेकिन कृति के समर्थन में आई प्रतिक्रियाओं ने यह जरूर दिखाया कि महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली सार्वजनिक निगरानी को लेकर सोशल मीडिया का एक वर्ग अब सवाल उठाने लगा है।
यह विवाद आने वाले समय में भी इसी बड़े सवाल को चर्चा में रख सकता है कि परंपरा का सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता किस तरह साथ चल सकते हैं। कृति का विज्ञापन इसी बहस का एक नया उदाहरण बन गया है।
