- होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने, परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक सहयोग पर बनी सहमति
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही शत्रुता को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 14 सूत्रीय शांति समझौते पर वर्चुअल हस्ताक्षर किए हैं। समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते और प्रतिबंधों में राहत को लेकर 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया शुरू करने का प्रावधान किया गया है।
अमेरिका की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मुलाकात के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी समझौते की पुष्टि करते हुए बताया कि ओमान और अन्य मध्यस्थ देशों के साथ लंबे समय से परामर्श चल रहा था तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर व्यापक सहमति बन चुकी है।
समझौते के तहत लेबनान समेत क्षेत्र में चल रहे सभी सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने का संकल्प लिया गया है। दोनों पक्षों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते को आकार देने के लिए वार्ता पूरी करने पर सहमति जताई है। आवश्यकता पड़ने पर इस अवधि को आपसी सहमति से बढ़ाया भी जा सकेगा।
दस्तावेज के अनुसार अमेरिका चरणबद्ध तरीके से नौसैनिक नाकाबंदी और संबंधित आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके बदले ईरान शुरुआती 60 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवाजाही की सुविधा देगा। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
समझौते में ईरान पर लगाए गए विभिन्न आर्थिक प्रतिबंधों को क्रमबद्ध रूप से समाप्त करने, विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियों को जारी करने और ईरानी तेल निर्यात पर शुल्क संबंधी रियायतें देने का भी उल्लेख है। इसके साथ ही ईरान के आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश और सहयोग कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने पर भी सहमति बनी है।
ईरान ने एक बार फिर परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। समझौते में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार के भविष्य और परमाणु गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा का प्रावधान भी शामिल किया गया है। यह समझौता मध्य पूर्व में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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