मुंबई, 20 अगस्त : आमिर खान प्रोडक्शंस की फिल्म ‘बटवारा 1947’ रिलीज के बाद लगातार चर्चा में बनी हुई है। भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म को कहानी, अभिनय और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए दर्शकों और समीक्षकों से प्रतिक्रिया मिल रही है। अब इस फिल्म के संदेश की इस्लामिक काउंसिल के चेयरमैन मुफ्ती मंजूर ने भी सराहना की है।
मुफ्ती मंजूर ने एक वीडियो साझा करते हुए ‘बटवारा 1947’ में दिखाए गए प्रेम और इंसानियत के भाव की तारीफ की। उन्होंने खास तौर पर फिल्म में एक मां के प्यार और उसके दर्द को रेखांकित किया। उनके मुताबिक, मां के प्रेम के सामने धर्म, जाति और अन्य तरह के भेदभाव छोटे पड़ जाते हैं।
मुफ्ती मंजूर ने फिल्म के संदेश को सराहा
मुफ्ती मंजूर ने फिल्म की कहानी में दिखाई गई मानवीय संवेदनाओं को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ‘बटवारा 1947’ नफरत के माहौल के बीच प्रेम और इंसानियत की बात करती है।
उनकी प्रतिक्रिया में फिल्म के उस भाव को प्रमुखता मिली, जिसमें विभाजन जैसे कठिन ऐतिहासिक दौर के बीच इंसानी रिश्तों और भावनाओं को केंद्र में रखा गया है। उन्होंने फिल्म को लोगों के दिलों को जोड़ने वाला संदेश देने वाली प्रस्तुति के रूप में सराहा।
मुफ्ती मंजूर ने यह भी कहा कि फिल्म दर्शकों के भीतर मौजूद नफरत को कम करके उसकी जगह प्रेम की भावना पैदा करने का संदेश देती है। उनकी यह प्रतिक्रिया फिल्म के भावनात्मक पक्ष को लेकर सामने आई है।
मां के प्यार को बताया सबसे बड़ी भावना
फिल्म की कहानी में मां के प्रेम और उसके दर्द को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मुफ्ती मंजूर ने इसी पहलू को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मां का प्यार ऐसा भाव है, जिसके सामने धर्म और जाति जैसे भेदभाव बहुत छोटे हो जाते हैं।
उन्होंने निर्देशक राजकुमार संतोषी की भी सराहना की और कहा कि उन्होंने मां के प्रेम की गहराई को संवेदनशील तरीके से पर्दे पर प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, फिल्म में नफरत के बीच प्रेम का संदेश देकर लोगों को जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।
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विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों में अक्सर उस दौर की त्रासदी और सामाजिक तनाव प्रमुख विषय रहे हैं। ‘बटवारा 1947’ में भी इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बीच मानवीय रिश्तों और भावनाओं को कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
राजकुमार संतोषी के निर्देशन की भी तारीफ
मुफ्ती मंजूर ने फिल्म के निर्देशक राजकुमार संतोषी की भी प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से मां के प्रेम को जिस संवेदनशीलता के साथ फिल्म में प्रस्तुत किया गया है, उसे रेखांकित किया।
राजकुमार संतोषी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता फिल्मकार हैं और हिंदी सिनेमा में अलग-अलग विषयों पर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। ‘बटवारा 1947’ के जरिए उन्होंने भारत के विभाजन के दौर को एक भावनात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।
फिल्म को लेकर सामने आई प्रतिक्रिया में इसके भावनात्मक पक्ष और मानवीय संदेश को प्रमुखता मिल रही है। मुफ्ती मंजूर की टिप्पणी भी इसी पहलू पर केंद्रित रही।
फिल्म में नजर आ रही है दमदार कलाकारों की टीम
‘बटवारा 1947’ में शबाना आजमी, सनी देओल, प्रीति जी जिंटा, करण देओल, अली फजल और अभिमन्यु सिंह जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
फिल्म की खास बात यह भी है कि राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर साथ आई है। दोनों की पिछली चर्चित फिल्मों की वजह से इस पुनर्मिलन को लेकर पहले से ही दर्शकों के बीच उत्सुकता रही है।
प्रीति जी जिंटा की भी फिल्म में महत्वपूर्ण मौजूदगी है। वहीं शबाना आजमी और अली फजल जैसे अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी फिल्म के अभिनय पक्ष को मजबूत करती है।
संगीत में ए. आर. रहमान और गीत जावेद अख्तर के
फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी ए. आर. रहमान ने संभाली है, जबकि गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं। संगीत और गीतों का यह संयोजन फिल्म के भावनात्मक वातावरण को मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण हिस्सा है।
‘बटवारा 1947’ का निर्माण आमिर खान और अपर्णा पुरोहित ने किया है। फिल्म आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी है और निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है।
फिल्म को दुनियाभर में 14 अगस्त 2026 को रिलीज किया गया, जिसे पार्टिशन डे के साथ जोड़ा गया। रिलीज के बाद से ही फिल्म अपने विषय और भावनात्मक कहानी को लेकर चर्चा में है।
प्यार और इंसानियत के संदेश पर केंद्रित कहानी
‘बटवारा 1947’ को लेकर मुफ्ती मंजूर की प्रतिक्रिया फिल्म के उस पक्ष को सामने लाती है, जिसमें विभाजन की पृष्ठभूमि के बावजूद इंसानी रिश्तों और प्रेम को प्राथमिकता दी गई है।
फिल्म को मिली उनकी सराहना यह बताती है कि कहानी का भावनात्मक संदेश अलग-अलग दर्शक वर्गों तक पहुंच रहा है। खास तौर पर मां के प्रेम को धर्म और जाति से ऊपर रखने वाली भावना उनकी प्रतिक्रिया का प्रमुख हिस्सा रही।
फिल्म के सामने आने वाले संदेश और कलाकारों के अभिनय को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इसकी चर्चा को और आगे बढ़ा सकती है। फिलहाल ‘बटवारा 1947’ विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ प्रेम और इंसानियत की कहानी को लेकर दर्शकों के बीच मौजूद है।
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