मुंबई, 9 मई : मदर्स डे के खास मौके पर फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली की जिंदगी से जुड़ी एक भावुक कहानी फिर चर्चा में है। भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और मशहूर निर्देशकों में गिने जाने वाले संजय लीला भंसाली ने अपनी मां को सम्मान देने के लिए उनका नाम “लीला” अपने नाम के साथ हमेशा के लिए जोड़ लिया। यही वजह है कि आज पूरी दुनिया उन्हें संजय लीला भंसाली के नाम से जानती है।
भंसाली को भारतीय सिनेमा का ऐसा फिल्ममेकर माना जाता है, जिनका नाम राज कपूर, के. आसिफ और गुरु दत्त जैसे बड़े कलाकारों के साथ लिया जाता है। अपनी भव्य फिल्मों, शानदार दृश्यों और भारतीय संस्कृति से जुड़ी कहानियों के जरिए उन्होंने दुनियाभर में भारतीय सिनेमा को नई पहचान दिलाई है। हालांकि उनकी इस सफलता के पीछे उनकी मां का संघर्ष, प्यार और आशीर्वाद सबसे बड़ी ताकत रहा है।
एक ऐसे समय में जहां पहचान अक्सर परिवार की शोहरत और नाम से तय होती है, संजय लीला भंसाली ने अपनी मां के सम्मान को अपनी पहचान बना लिया। उन्होंने एक बातचीत में कहा था, “जब मैंने खुद को संजय लीला भंसाली बुलाने का फैसला किया, तब मैंने नहीं सोचा था कि मैं कोई नई शुरुआत कर रहा हूं। लेकिन अगर लोग अपने नाम में अपने माता-पिता का सम्मान जोड़ रहे हैं, तो यह बहुत अच्छी बात है। हमें अपने माता-पिता के लिए और भी बहुत कुछ करना चाहिए।”
उन्होंने यह भी बताया था कि उनके पिता उनकी सफलता देखने के लिए जीवित नहीं रहे, लेकिन उनकी मां का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहा। भंसाली के मुताबिक, उनकी मां ने उन्हें मुश्किल हालात में भी कभी हार न मानने की ताकत दी। यही हिम्मत उनकी फिल्मों और किरदारों में भी साफ दिखाई देती है।
‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ की मजबूत महिला किरदारों से लेकर ‘पद्मावत’ और ‘हीरामंडी: द डायमंड बाजार’ की शालीनता और भावनात्मक गहराई तक, भंसाली की films में महिलाओं के प्रति सम्मान साफ नजर आता है।
इस मदर्स डे पर संजय लीला भंसाली की कहानी यह याद दिलाती है कि हर सफल इंसान के पीछे एक मां का त्याग, भरोसा और आशीर्वाद होता है। वहीं अब दर्शकों की नजर उनकी आने वाली फिल्म ‘लव एंड वॉर’ पर टिकी है, जिसे उनके करियर का एक और बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।

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